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मोदी सरकार द्वारा कृषि कानून वापिस लेने के मामलें में येचुरी ने दिया यह बयान


लुधियाना:- हिन्द कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राष्ट्रीय महासचिव सीता राम येचूरी ने कहा कि कृषि कानून वापिस लेने के मामलें में मोदी सरकार पर भरोसा नहीं किया जा सकता। जब तक संसद में तीनों कृषि कानून रद्द नहीं हो जाते तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने कृषि काननूों को वापिस लेकर किसानों पर कोई मेहरबानी नहीं की। बल्कि पिछले समय के दौरान हरियाणा, हिमाचल व राजस्थान के उप चुनाव में भाजपा को उम्मीद के मुताबिक नतीजे न मिलने के बाद ही मोदी सरकार ने कृषि कानूनों को वापिस लेने का ऐलान किया है। ताकि 2022 में पंजाब समेत देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा नहीं चाहती कि उनको हार के रूप में निराशा का सामना करना पड़े।
येचूरी आज यहां लुधियाना में सी.पी.आई. (एम) की दो दिवसीय 23वीं राज्य स्तरीय कांफ्रैंस में शिरकत करने से पहले मीडिया से बात कर रहे थें। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी किसानों के साथ डट कर खड़ी है और इस बात का जोरदार समर्थन करती है कि जब तक तीनों कृषि कानून संसद में रद्द नहीं हो जाते तब तक किसान मोर्चे पर डटे रहे। उन्होंने कहा कि किसानों की एम.एस.पी. की मांग व इस संबधी कानून बनाने को लेकर सी.पी.आई. एम) संसद में किसानों के हक में आवाज बुंलद करते हुए समर्थन करेगी।
येचूरी ने कहा कि संसद का होने वाला सैशन कैसा रहेगा, ये तो सत्ताधारी मोदी सरकार पर निर्भर करता है। सी.पी.आई. एम) समेत अन्य राजनीतिक दल कृषि कानूनों समेत अलग-अलग मुद्दों पर संसद में चर्चा करने की तैयारी में है। मोदी सरकार चर्चा होने देगी या नहीं। यह तो संसद का सैशन शुरू होने पर केन्द्र सरकार के व्यवहार पर ही निर्भर करेगा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार होती है या फिर चर्चा की मांग करने वालों को संसद से बाहर का रास्ता दिखाती है। क्योंकि इससे पहले जब मोदी सरकार ने कृषि कानून बिल संसद में पारित करने थें तों उस समय सी.पी.आई.(एम) के सांसदों ने बिल पर चर्चा करने की मांग की थीं। मांग को मानने की बजाय सांसदों को संसद से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
2022 में पंजाब विधान सभा चुनाव में सी.पी.आई. (एम) की क्या रणनीति रहेगी, संबधी पूछे सवाल के जवाब में उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि भाजपा को पराजित करना ही एक मकसद रहेगा। कांग्रेस के साथ गठजोड़ करेगें, तो येचूरी ने कहा कि अभी चुनाव में समय है। हम लोग राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर मौजूदा राजनीतिक हालातों पर विचार विर्मश कर रहे है ताकि भाजपा को सत्ता से दूर रखा जा सकें। उन्होंने एक सवाल के जवाब में इस बात पर चिंता का इजहार किया कि त्रिपुरा समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में भाजपा हिंदूत्व का पत्ता खेल कर अपना वोट बैंक मजबूत करना चाहती है और इस मकसद की प्राप्ति के लिए किसी भी हद तक जा रही है। जोकि देश के लिए किसी खतरे से कम नहीं है।
कंगना रानौत के मामलें में येचूरी ने कहा कि अदाकारा को देश की आजादी के संबध में कोई स्टेटमेंट देने से पहले इस संबध में स्टडी कर लेनी चाहिए। मोदी सरकार द्वारा क्रिप्टोकरंसी पर बैन लगाने के सवाल पर येचूरी ने कहा कि सबसे पहले तो इस बात पर चर्चा की जरूरत है कि इसकी जरूरत क्यों पड़ी और अब क्यों बैन लगाने की नौबत आ गई। सबसे पहले तो विदेशी क्रिप्टोकरंसी पर सरकार को पांबदी लगाने संबधी संसद में प्रस्ताव लेकर आना चाहिए। इस अवसर पर सी.पी.आई.(एम) के पोलिट ब्यूरो मैंबर निलोतपाल बासू, पंजाब सचिव कामरेड सुखविंदर सिंह सेखों, कामरेड गुरचेतन सिंह, डा गुरविंदर सिंह, बी.एस. शाही, देसराज, सुखमिंदर सिंह लोटे, जोगिंदर राम, चेतन शर्मा, बलबीर सिंह, सतनाम बड़ैच, कुलविंदर सिंह उड़त, भूपचंद चन्नो, गुरदर्शन खासपुर आदि उपस्थित थें।

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