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डब्ल्यूटीओ के कृ़षि संबंधी नियम विकासशील देशाें के विरुद्ध: पीयूष


नयी दिल्ली:- केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के कृषि संबंधी नियमों में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा है कि ये विकासशील देशों के हितों के विरुद्ध हैं।
श्री गोयल ने विकासशील देशों के संगठन ‘जी-33’ की ऑनलाइन अनौपचारिक मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि विश्व व्यापार संगठन में कृषि पर समझौता असंतुलन से भरा हुआ था। यह विकसित देशों का पक्ष लेता है और कई विकासशील और अल्पविकसित देशों के हितों के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरुरी है कि सार्वजनिक भंडारण से संबंधित डब्ल्यूटीओ प्रावधानों में बदलाव किया जाए जिससे सकारात्मक परिणाम सामने आ सके। उन्होेंने कहा कि कृषि संबंधी नियमों में सुधार का पहला कदम नियम-आधारित, निष्पक्ष और न्यायसंगत व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए ऐतिहासिक विषमताओं और असंतुलनों को ठीक करना है।
केंद्रीय मंत्री ने ‘जी 33’ के सदस्य देशों से संगठन के सामंजस्य को बनाए रखने के लिए सामूहिक रूप से काम करने का आग्रह किया और कहा कि कृषि पर निष्पक्ष, संतुलित और विकास-केंद्रित परिणाम के लिए कृषि समझौते में सुधार किया जाना चाहिए। अनौपचारिक मंत्रिस्तरीय बैठक की अध्यक्षता इंडोनेशिया के व्यापार मंत्री मुहम्मद लुत्फी ने कल देर शाम की।
यह बैठक इस वर्ष 30 नवंबर से तीन दिसंबर तक होने वाली 12 वीं मंत्रिस्तरीय बैठक के मुद्दे तय करने और जी- 33 में कृषि संबंधी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आयोजित की गयी थी। बैठक को डब्ल्यूटीओ के महानिदेशक डा. नगोजी ओकाेंजो इवेला ने भी संबाेधित किया। बैठक में भारत समेत 21 सदस्य देशों के 47 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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