January 24, 2021

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सावन की चौथी सोमवारी पर सादगी से पूजा-अर्चना

राँची:- आज सावन की चौथी सोमवारी है और आज के दिन शिवमंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, लेकिन कोरोना वायरस के कारण श्रद्धालुओं ने अपने घर में ही रहकर पूजा अर्चना की और बाबा बैद्यनाथधाम, वासुकिनाथधाम और पहाड़ी मंदिर में जलाभिषेक का ऑनलाइन वर्चुअल दर्शन किया।
देवघर स्थित बाबा मंदिर में लाखों की संख्या में जनसैलाब उमड़ती थी लेकिन कोरोना के कारण मेला नहीं लगाया गया है और सीमित पुरोहित ही बाबा भोले की पूजा अर्चना कर रहे हैं। श्रद्धालुओ के दर्शन के लिए ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था की गई है।
सावन के पवित्र महीने के चाथे सोमवारी पर राजधानी रांची के प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर पर सन्नाटा पसरा रहा। हर वर्ष सोमवारी को यहां भक्तों की भीड़ लगी रहती थी, लेकिन इस बार कोरोना महामारी के कारण प्रशासन के द्वारा किसी को मंदिर या देवस्थल पर प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई है। भक्त बाहर से ही प्रणाम करते नजर आ रहे हैं ।ऐसा पहली बार हुआ है कि दुकानों में रौनक नहीं है और ग्राहकों की आस लगाए दुकानदार दिन भर बैठे रहे। वीं श्रद्धालुओं ने घर में ही रहकर बाबा भोलेनाथ ही पूजा अर्चना की।
चौथी सोमवारी को दुमका के जगत प्रसिद्ध बाबा बासुकिनाथ की भव्य प्रातःकालीन पूजा हुई। कोरोना संक्रमण के कारण आज भी मंदिर प्रांगण में किसी बाहरी भक्त को प्रवेश की अनुमति नहीं दी गयी। मंदिर के प्रधान पुजारी सदाशिव पंडा ने शोडषोपचार विधि (शोडष$ उपचार) बाबा की पूजा की। बाबा का दुध, दही, गंगाजल, गुड़, मधु, इत्र आदि से अभिषेक करने के बाद चंदन, अबीर का लेप लगाया और फिर पुष्प-बेलपत्र आदि से बाबा का श्रृंगार किया। सावन की सोमवारी और उस दिन देवाधिदेव के शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व है। आज के दिन हर साल बाबा बासुकिनाथ धाम में लाखों शिवभक्तों की भीड़ उमड़ती थी, मगर इस बार पूरा प्रांगण खाली है। मंदिर से पांच किलोमीटर पहले ही लोगों को रोक दिया जा रहा है।
लोककथाओं के अनुसार सावन महीने में ही समुद्र मंथन हुआ था और प्रत्येक सोमवारी को विशेष रत्नों की प्राप्ति हुई थी। आज के दिन पारिजात वृक्ष की उत्पत्ति हुई थी, जो पृथ्वी पर नहीं है।इसलिए आज के दिन बाबा भोले की जल और बेलपत्र से पूजा अर्चना करने पर मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि सावन में सोमवार का विशेष महत्व होता है. शिव के शीर्ष पर चंद्रमा विराजमान है और जटा से गंगा निकलती है, ऐसे में जो मस्तक पर विराजमान हो वो खास होता है, सोम ’चंद्रमा’ को कहते हैं. ऐसे में सोमवारी विशेष होती है।

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