भारत एक उभरती हुई अर्थ व्यवस्था है, इसमें कोई दो राय नहीं है पर मैं यह सोचने के लिए मज़बूर हो जाता हूँ की क्या दुनिया की अगली महाशक्ति के रूप में हम दुनिया को क्या सीखा पाएंगे जबकि हमारे खुद की समस्याएं अनसुलझी हुई है। क्या हमारी सड़को पे यही कचड़ो का ढेर पड़ा रहेगा, क्या हमारी महिलाएं ऐसी ही असुरक्षित रहेंगी? इन सवालो के जबाब अभी दे पाना वैसे तो मुश्किल है पर हम कोशिश ज़रूर कर सकते हैं की हमारा आने वाला कल आज से बेहतर हो।  इसके लिए हमें हर संभव कोशिश करना पड़ेगा की हम हर वह  कदम उठाएं जिससे हमारा ही नहीं अपितु हमारे बच्चो का भविष्य उज्जवल हो। आज जिस प्रकार से प्रदूषण, हिंसा और बलात्कार जैसी घटनाएं बढ़ रही है, यह पुरे समाज के लिए चिन्ता का विषय है।  बच्चो को उचित संस्कार दे कर भी हम अपने एक सुन्दर कल की नींव रख सकते हैं अतः यह आवश्यक हो जाता है की हम अपने बच्चो को हर किसी के मान सम्मान का ख्याल रखना सीखलायें।  प्रदुषण से निबटने के लिए हम प्रति व्यक्ति अगर २५ पेड़ भी लगाएं तो यह समस्या दूर हो सकती है।  ऐसी कोई भी समस्या नहीं है जिसका  हल नहीं है, ज़रूरत है तो सिर्फ कदम उठाने की।  

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