January 17, 2021

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कोरोना के खिलाफ जंग, जापानी एजेंसी भारत को देगी 2069 करोड़ रुपये का कर्ज

नई दिल्ली:- जापान की अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जीका) ने भारत के साथ 30 अरब जापानी येन (करीब 2,069 करोड़ रुपये) की आधिकारिक विकास सहायता (ओडीए) उपलब्ध कराने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कर्ज सहायता भारत को सामाजिक संरक्षण के लिए कोविड- 19 संकट में प्रतिक्रिया समर्थन कर्ज के तौर पर उपलब्ध कराई जा रही है।

कुल 50 अरब येन तक का प्रावधान

जीका ने एक वक्तव्य में यह जानकारी दी है। जापान के भारत में राजदूत सुजुकी सतोशी और वित्त मंत्रालय में आथिर्क मामलों के विभाग में अतिरिक्त सचिव सीएस महापात्रा ने इस संबंध में दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया। यह कोविड-19 से निपटने के लिए किए जाने वाले उपायों के तहत येन कर्ज के प्रावधान के तहत किया गया है। इसमें कुल मिलाकर 50 अरब येन तक का प्रावधान है।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में होगा सहायक
जीका इंडिया के प्रमुख प्रतिनिधि कात्सुओ मात्सुमोतो ने कहा कि इस परियोजना का मकसद सरकार को उसकी प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) के तहत किए जा रहे प्रयासों में मदद करना है। योजना में समाज के उन वंचित समूहों का सशक्तीकरण किया जाता है जिनका जीवन महामारी के कारण बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
इस परियोजना के अलावा जीका ने भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए कोविड-19 संकट प्रतिक्रिया आपात समर्थन के लिए भी ओडीए कर्ज उपलब्ध कराया है। यह परियोजना प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना के तहत चलाई जाती है।

पहले कुशल कामगारों की सहभागिता समझौते को मिली मंजूरी

इससे पहले छह जनवरी को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और जापान के बीच ‘निर्दिष्ट कुशल कामगारों’ की सहभागिता से जुड़े समझौता ज्ञापन (एमओसी) पर हस्ताक्षर की मंजूरी प्रदान कर दी थी। सरकारी बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

भारत और जापान के बीच स्थापित होगा संस्थागत तंत्र

यह समझौता ज्ञापन निर्धारित कुशल कामगारों के संबंध में तय व्यवस्था के उचित परिचालन के लिए सहभागिता का मूलभूत ढांचा तैयार करने के संबंध में है। बयान में कहा गया है कि इस सहयोग समझौता ज्ञापन के तहत भारत और जापान के बीच सहभागिता और सहकार से जुड़ा एक संस्थागत तंत्र स्थापित होगा। इसके तहत जापान में 14 निर्दिष्ट क्षेत्रों में काम करने के लिए ऐसे कुशल भारतीय कामगारों को भेजा जाएगा जिन्होंने अनिवार्य कुशलता योग्यता प्राप्त करने के साथ ही जापानी भाषा की परीक्षा पास कर ली है। इसमें कहा गया है कि इन भारतीय कामगारों को जापान सरकार की ओर से ‘निर्दिष्ट कुशल कामगार’ नाम की एक नई सामाजिक स्थिति (न्यू स्टेटस ऑफ रेजिडेंस) प्रदान की जाएगी।

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