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एक नयी सुबह का

वन धन योजना गेमचेंजर का का कार्य कर सकती है-अर्जुन मुंडा


गुवाहाटी:- जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने अपने दो दिवसीय असम दौरे के दौरान राज्य अतिथि गृह गुवाहाटी में आज कहा कि “जहां वन धन योजना असम में जनजातीय आजीविका और उद्यमों को बढ़ावा देने में एक गेमचेंजर का कार्य कर सकती है, वहीं एकलव्य विद्यालय जनजातीय बच्चों को अन्य समुयायों के बच्चों के समरूप तथा उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करेंगे।
श्री मुंडा राज्य के दो दिवसीय दौरे पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा से मिलने के लिए वहां गए थे। मुख्यमंत्री के साथ इस लंबी बैठक का उद्देश्य राज्य में लघु वनोपज, वन धन स्वयं सहायता समूह और ट्राईफूड परियोजनाओं जैसे जनजातीय विकास कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की स्थिति की समीक्षा करना और उनके बारे में जानकारी हासिल करना था। इस बैठक में असम सरकार के कई मंत्री व प्रमुख सचिव, और ट्राईफेड के प्रबंध निदेशक प्रवीर कृष्ण तथा अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
केंद्रीय मंत्री द्वारा बैठक के दौरान, जनजातीय सुधार के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों जैसे लघु वनोपजों की न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना, वनधन योजना, जनजातीय समुदाय के लिए ईएसडीपी प्रशिक्षण, आदि के संबंध में असम राज्य द्वारा की गई प्रगति की समीक्षा की गई।इससे पहले अगस्त में, असम के मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में ट्राईफेड दल के साथ मुलाकात की थी ताकि राज्य में जनजातीय विकास के विस्तार की योजना बनाई जा सके और आगे क्या कदम उठाए जाएं इस विषय पर चर्चा की जासके। इस बैठक के दौरान जनजातीय विकास को अगले स्तर पर ले जाने की भविष्य की योजनाओं को भी प्रदर्शित किया गया और उन पर चर्चा की गई।
अपने दो दिवसीय दौरे पर, श्री मुंडा के साथ ट्राईफेड के प्रबंध निदेशक प्रवीर कृष्ण और मंत्रालय तथा ट्राईफेड के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी थे। मुख्यमंत्री के साथ बैठक के बाद, केंद्रीय मंत्री ने नॉर्थ ईस्ट रीज़नल सेंटर के लक्ष्मीबाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फ़िज़िकल एडुकेशन मेंवॉइस ऑफ नॉर्थ ईस्ट जनजातीय लीडर कॉन्फ्रेंस मे ंभाग लिया।
पूर्वोत्तर भारत के असम राज्य में जनजातीय समुदाय की आबादी 33,08,570 है, जो कुल आबादी का 12.4प्रतिशत है। पिछले दो वर्ष के दौरान,’न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के माध्यम से लघु वनोपजों (एमएफपी) के विपणन के लिए तंत्र और लघु वनोपजों (एमएफपी) के लिए मूल्य श्रृंखला का विकास’ योजना इस राज्य में पिछले दो वर्षों में बदलाव का प्रतीक बनकर सामने आयी है।
असम राज्य ने लघु वनोपजों की न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना का भरपूर उपयोग किया है जिसमें भारत सरकार की निधियों का उपयोग कर 37.39 लाख रुपए मूल्य के कुल 58.56 मीट्रिक टन लघु वनो पजों की खरीद की गई है।वनधन योजना के तहत कुल 1,920 वन धन स्वयं सहायता समूह स्वीकृत किए गए हैं जिन्हें 128 वन धन विकास केंद्र समूहों में समूहित किया गयाहै। जिससे 37,786 जनजातीय वनोपज संग्रहकर्ताओं को सीधा लाभ हो रहा है। इन वन धन विकास केंद्र समूहों के संचालन के लिए कुल 19.20 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है।
दौरे के दूसरे दिन के कार्यक्रम में असमके राज्यपाल जगदीश मुखी के साथ एक बैठक और भारतीय उद्यमिता संस्थान (आईआईई) द्वारा आयोजित वनधन कार्यशाला का दौरा शामिल हैं, जहां वह योजना के लाभार्थियों के साथ बातचीत करेंगे।
जमीनी स्तर पर कार्यक्रमों की इस तरह की समीक्षा, निगरानी और कार्यान्वयन की योजना सभी राज्यों के लिए बनाई जा रही है ताकि जनजातीय लोगों के लिए आय सृजन और उन्हें सशक्त बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
ट्राईफेड पूरे देश में जनजातीय समुदाय के जीवन और उनकी आजीविका के सम्पूर्ण परिवर्तन के लिए और आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में प्रगति करने के अपने मिशन में जी-जान के साथ लगा हुआ है।

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