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धनबाद साइबर थाने का अनोखा खेल: साइबर अपराधी एक नंबरी तो दरोगा जी दस नंबरी,निर्दोषों से ठग लिए लाख रुपये

धनबाद :- जब रक्षक ही भक्षक ही बन जाये या बाड़ ही खेती चरने लगे तो क्या कहने!साइबर अपराध की रोकथाम के लिए हर जिले में साइबर थाना की स्थापना की गई है।लेकिन ये दुर्भाग्य है कि यहां पदस्थापित दरोगा जी ही क्राइम करने लगे हैं।क्या इन्हें उनके अपराध की सजा मिलेगी?धनबाद के साइबर थाना के मालिक तो ईमानदार हैं पर छोटे मियां शुभानल्लाह की भूमिका में हैं।क्या बड़े साहब इनकी खबर लेंगे?
मामला ऐसा है कि साइबर थाना में एक प्रशिक्षु दरोगा भगत जी हैं,उनका पेट बड़ा है और पेट में दांत भी है।जानिए उनका अद्वभूत कारनामा।
बताया जाता है कि पिछले 16 जुलाई को धनबाद के पुटकी से तीन युवकों को साइबर अपराध के कथित जुर्म में हिरासत में लिया गया था। इन पर साइबर ठगी करने का संदेह था । तीनों युवक निरसा पीठाकियारी गांव थे।तीनों नाम मलय रविदास , धर्मा रविदास व विष्णु रविदास है।काफी पड़ताल के बाद भी उनसे कोई साक्ष्य नहीं मिला। उसके बाद थाने के नए रंगरूट दरोगा भगत जी और उसके एक सहयोगी दरोगा ने शुरू किया पैसे ऐंठने का खेल। 5 लाख से शुरू हुई बोली तीन लाख पर पटी । जब डीएसपी के कानों तक बात पहुंची तो उन्होंने फौरन जाल बिछा दिया।भगत के आवास पर पंहुचते ही डीएसपी साहब को सारा माजरा का पता चल गया।भगत जी पैसे गिनने में लीन थे।डीएसपी साहब के दबाव में दो लाख रुपये वापस कर दिए गए,एक लाख रु डकार लिए गए।मामला चर्चा का विषय है।

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