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मुख्यमंत्री का भाषाई स्तर पर विभेद करना दुर्भाग्यपूर्ण : संजय सेठ

झारखंड आंदोलन में हर वर्ग की रही है भूमिका।

राँची:- भोजपुरी, मगही व अन्य भाषाओं पर मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी के द्वारा दिया गया बयान बेहद दुखद और शर्मनाक है। संविधान पर आस्था रखते हेमंत सोरेन जी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है, उसी संविधान ने इन भाषाओं को मान्यता दी है। देश के कई विश्वविद्यालयों यहां तक कि विदेशों में भी इन भाषाओं की पढ़ाई होती है। कई सुप्रसिद्ध रचनाएं हुई है। कई बड़ी हस्तियों ने इन भाषाओं को अंतरराष्ट्रीय पटल तक पहुंचाया है। ऐसे में मुख्यमंत्री के द्वारा भाषाई स्तर पर विभेद करना यह दर्शाता है कि मुख्यमंत्री संविधान में आस्था नहीं रखते हैं। उक्त बातें रांची के सांसद श्री संजय सेठ ने एक बयान जारी कर कही। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन एक ऐसा आंदोलन रहा, जिसमें सभी समाज की भूमिका रही। हर वर्ग ने झारखंड के लिए अपनी कुर्बानिया दी। हर किसी ने अपनी क्षमता के अनुसार अपना त्याग किया। बावजूद इसके मुख्यमंत्री के द्वारा ऐसा कहना समाज में विभेद पैदा करने वाला है। श्री सेठ ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री जी को ऐसे बयान देने से पहले भारत की भाषाओं का इतिहास पढ़ना चाहिए। आज भोजपुरी और मगही के कलाकार वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाए हैं। इन भाषाओं ने हर क्षेत्र में अपनी प्रसिद्धि पाई है। श्री सेठ ने कहा कि मुख्यमंत्री बार-बार कमजोर और दबा कुचला बोलकर झारखंड के बड़े आदिवासी समाज का भी अपमान करते हैं। हर क्षेत्र में आर्थिक संपन्नता ही विकास का पैमाना नहीं हो सकती। आदिवासी समाज से भगवान बिरसा मुंडा, जयपाल सिंह मुंडा, रामदयाल मुंडा सहित कई विभूतियों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। और आज भी झारखंड का आदिवासी समाज हर मुद्दे पर देश और समाज के साथ खड़ा होता है। श्री सेठ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन इस तरह की बयानबाजी नहीं करें, जिससे कि समाज में विभेद पैदा हो। मुख्यमंत्री का काम समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलना है। सभी भाषाओं का प्रतिनिधित्व करना है। समाज के सभी वर्ग के लिए चिंता करना है। ऐसा करके मुख्यमंत्री समाज में विभेद पैदा कर रहे हैं, जो किसी भी स्तर पर सभी समाज के लिए अच्छा नहीं है।

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