शिव शिष्य हरीन्द्रानन्द फाउंडेशन के तत्त्वावधान में ‘‘सांसें हो रही हैं कम, आओ वृक्ष लगायें हम’’ विषयक दो दिवसीय कार्यशाला ‘‘बापू सभागार’’ गाँधी मैदान, पटना में आयोजित की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरेण्य गुरूभ्राता श्री हरीन्द्रानन्द जी ने कहा वन की महत्त्व से हम सभी परिचित हैं। अगर हम इतिहास के पन्नों को पलट कर देखेंगे, तो हम पायेंगे कि पूर्व में वनों का प्रतिशत ज्यादा था, जनसंख्या कम थी, पशुओं की संख्या भी कम थी। इसलिए इसके महत्व के बारे में लोग उतना नहीं सोचते थे, लेकिन बाद में जनसंख्या वृद्धि, औद्योगिकीकरण, शहरीकरण, संरचनात्मक विकास की वृद्धि के साथ-साथ वनों का विनाश होता गया, जिसका परिणाम आज हाल की घटनाओं के रूप में प्रकट होता है। कहने का तात्पर्य है कि कहीं सूखा तथा कहीं बाढ़, तो कहीं  Landslide के रूप में हमारे सामने आता है। पेड़-पौधे मनुष्य के लिए ही नहीं अपितु समस्त जीव-जंतुओं के लिए आवश्यक हैं। इनके अभाव में प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखना असंभव है। यह महत्वपूर्ण कार्य सामुहिक प्रयासों से ही संभव है।

कार्यशाला का शुभारंभ राष्ट्रगान से हुआ। पटना ग्रामीण क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से आये हुए लोगों का स्वागत कुँवर ब्रजेश सिंह ने किया। शिव शिष्य हरीन्द्रानन्द फाउंडेशन के मुख्य सलाहकार अर्चित आनन्द ने कहा कि हमें वृक्षों को लगाना चाहिए। हम सब मिलकर लगभग पाँच लाख से ज्यादा वृक्ष लगा चुके हैं और निरंतर इस दिशा में हम काम कर रहे हैं। बिहार का भौगोलिक क्षेत्रफल करीब 94163 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इनमें से 7.74 प्रतिशत हिस्से यानी 7288 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में ही वन है। पटना मे वायु प्रदुषण की स्थिति चुनौतीपूर्ण है। वायु प्रदुषण से सांस लेने में दिक्कत आती है, घुटन महसुस होती है। आँख, गले और फेफरे पर इसका सर्वाधिक नकारात्मक और घातक असर पड़ता है। बहुत गंभीर है। बिहार में पहले सालाना औसत वर्षापात 1000 से 1500 mm था जो आज घट कर 800 से 850 mm हो गया है। भुमिगत जल का स्तर लगातार निचे जा रहा है। इसका एक मात्र कारण वृक्षों का कटाव है। पेड़ों की सुरक्षा के लिए इससे बेहतर कुछ भी नहीं हो सकता कि हम वृक्षों को अपना समझें, अपने परिवार का हिस्सा समझें।

न्यास की अध्यक्षा बरखा सिन्हा ने कहा कि हमारे गुरू शिव प्रकृति का अयण करते हैं। वे प्रकृति के पालक है, संरक्षक भी हैं। शिव के शिष्य अपने गुरू शिव की बनाई हुई दुनियां के साथ छेड़छाड़ नहीं करते वरन् उसकी सुरक्षा एवं संरक्षण में मनसा-वाचा-कर्मणा तत्पर रहते हैं। प्रोफेसर रामेश्वर मंडल ने कहा कि शिव की शिष्यता से मन निर्मल किया जा सकता है। डॉक्टर अमित कुमार ने स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि स्वस्थ लोग ही स्वच्छ और समृद्ध देश बना सकते हैं। दूसरी ओर मिडिया प्रभारी अनुनीता ने कहा कि वृक्ष आदिकाल से ही मनुष्य के हितैषी रहे हैं। वृक्ष हमसे कुछ न लेते हुए भी हमें बहुत कुछ देते हैं जो एक सच्चा मित्र ही कर सकता है। दो दिवसीय कार्यशाला में पटना ग्रामीण क्षेत्र से लगभग दस हजार लोग आये थे। आगंतुकों ने भी अपने विचार रखे कि किस तरह से वृक्षों का संरक्षण किया जाय ताकि प्रदूषण से लड़ा जा सके और हम स्वच्छ हवा में साँसे ले सकें।

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