रांची:- डीएवी रांची जोन एफ के विद्यालयों में आज से दो दिवसीय आनलाईन शिक्षक कार्यशाला शुरू हो गयी। डीएवी पब्लिक स्कूल्स जोन एफ के सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी एम के सिन्हा ने इस कार्यशाला का उद्घाटन दीप जलाकर किया। इस अवसर पर श्री सिन्हा ने कहा कि शिक्षक यहां जो भी सीखें उसे क्लास रूम में व्यवहार में लाएं ताकि विद्यार्थियों को सीखने में और सुगमता हो सके।प्राचार्य ने कहा कि डीएवी के प्रधान आर्यरत्न पद्मश्री पूनम सूरी की झारखंड के डीएवी विद्यालयों पर विशेष कृपा और अनुकंपा रही है। झारखंड जोन एफ के लिए होने वाले दो दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम की सफलता के लिए डीएवी पब्लिक स्कूल्स ,वन,नई दिल्ली के निदेशक डॉ जेपी शूर ने शुभकामना संदेश भेजा है ।अपने संदेश में उन्होंने कहा है कि संस्थाएं अच्छा कार्य कर रही हैं लेकिन हमें और भी अच्छे कार्य करने हैं और भी सीखना है और सिखाना है। डॉ जेपी शूर के बारे में प्राचार्य ने कहा कि उनकी लगन, कर्मठता और काम के प्रति उनका लगाव देखते ही बनता है वे किसी भी समस्या का समाधान तुरंत कर देते हैं । वे समस्या निवारक, प्रोब्लम सोल्वर हैं।
मुख्य अतिथि ग्रामीण एसपी नौशाद आलम ने अपने आनलाईन संबोधन में कहा कि डीएवी संस्थाएं राष्ट्र के विकास में अपना योगदान देती रही है। वे डीएवी संस्था से बहुत पहले से जुड़े रहे हैं। उन्होंने दो दिवसीय कार्यशाला के सफल आयोजन की कामना की। सभा को जोन के पूर्व निदेशक डा केसी श्रीवास्तव ने भी संबोधित किया। अपने ऑनलाइन संबोधन में उन्होंने भी दो दिवसीय कार्यशाला के लिए शुभकामनाएं प्रदान की।
उल्लेखनीय है कि डीएवी विद्यालयों में सेंटर फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस,सीएई, के तहत इस वर्ष शिक्षकों को तीन दिनों की ट्रेनिंग जून महीने में कराई गई थी जबकि दो दिनों की ट्रेनिंग इस माह मास्टर ट्रेनरों द्वारा कराई जा रही है। सीएई की वर्तमान निर्देशिका डॉक्टर निशा निर्देशन में शिक्षकों को निरंतर प्रशिक्षित किया जा रहा है ।डीएवी ही ऐसा विद्यालय है जहां नए शिक्षकों को बढ़ने का मौका मिलता है तथा हर वर्ष डीएवीसीएई के तहत उन्हें ट्रेनिंग कराई जाती है।
मौके पर डीएवी गांधी नगर के प्राचार्य एसके सिन्हा, डीएवी बारियातू के प्राचार्य वीके पांडेय और डीएवी नीरजा सहाय के प्राचार्य तरुण कुमार मिश्र भी मौजूद थे।
सभी शिक्षकों ने अपने अपने विद्यालय से वेबिनार में भाग लिया।
आज संस्कृत विषय में वर्ण,अधिगम मूल्यांकन,लिंग, विभक्ति,वचन,कारक, शब्द रूप,विशेषण विषय पर चर्चा हुई। वहीं हिंदी में कथा , संवाद, अच्छे शिक्षक के गुण, मूल्यांकन और कविता शिक्षण पर चर्चा हुई। सामाजिक विज्ञान विषय में सामाजिक विज्ञान पढ़ाने का सशक्त तरीका, ग्लोबल वार्मिंग, वर्ग में नाटक थिएटर की भूमिका, ऑनलाइन शिक्षण को और प्रभावी कैसे बनाएं और फ्लिप क्लासरूम टीचिंग जैसे विषयों पर चर्चा की गई । जबकि शारीरिक शिक्षा विषय में स्पोर्ट साइकोलॉजी, शारीरिक शिक्षकों की चुनौतियां ,पर्सनैलिटी विकास वॉलीबॉल, योग और ध्यान विषय पर विशेषज्ञों ने प्रकाश डाला। कला और संगीत विषय में आर्ट इंटीग्रेशन ,विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास में संगीत की भूमिका, क्राफ्ट मॉडलिंग, चित्रांकन विषय को ऑनलाइन पढ़ाने की सशक्त विधि और एक कैरियर के रूप में संगीत विषय पर चर्चा हुई। वाणिज्य विषय में संदिग्ध खातों का उपयोग, योजना ,लाभ और हानि ,इंटरप्रेनरशिप, डिवेंचर तथा रसायन विज्ञान विषय में बोर्डिंग बॉन्डिंग पर विशेष चर्चा हुई। इसी प्रकार अन्य विषयों में भी विषय विशेषज्ञों ने कई विषय पर प्रकाश डाले। इस कार्यशाला में डी ए वी जॉन एफ के लगभग 800 शिक्षक भाग ले रहे हैं ।कल कार्यक्रम का दूसरा और अंतिम दिन है।

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