May 13, 2021

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एंटाली में जीत की हैट्रिक लगाने को बेताब हैं तृणमूल उम्मीदवार स्वर्ण कमल साहा

कोलकाता:- मध्य कोलकाता की एंटाली विधानसभा सीट राजनीतिक तौर पर बेहद अहम रही है। महानगर का यह इलाका वाणिज्यिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र है। अल्पसंख्यक मतदाताओं के प्रभाव वाले इस क्षेत्र में एक ओर भाजपा कमल खिलाने के लिए हाथ-पैर मार रही है तो वहीं तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार स्वर्ण कमल साहा अपनी जीत की हैट्रिक लगाने के सपने देख रहे हैं।
एंटाली विधानसभा क्षेत्र का इतिहास बताता है कि यहां से ज्यादातर अल्पसंख्यक उम्मीदवार ही चुनाव जीतते रहे हैं। 1977 से लेकर 2006 तक जितने भी चुनाव हुए हैं, उनमें ज्यादातर पहले और दूसरे स्थान पर अल्पसंख्यक समुदाय के उम्मीदवार ही रहे हैं। 2011 में पहली बार स्वर्ण कमल साहा ने इस परिपाटी को बदलने में कामयाबी हासिल की। 2011 विधानसभा चुनाव में स्वर्ण कमल साहा को 75 हजार 891 (56 प्रतिशत) वोट मिले और उन्होंने माकपा के देवेश दास को पराजित किया। इस चुनाव में माकपा को 24,996 (38 प्रतिशत) वोट ही मिल पाए। इसके बाद 2016 के चुनाव में भी स्वर्ण कमल साहा ने अपनी बढ़त कायम रखते हुए 75,841 मत हासिल किए जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी माकपा के देवेश दास को 47,853 वोट मिले। मंगलवार को “हिन्दुस्थान समाचार” से विशेष बातचीत में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार साहा ने बताया कि कोलकाता के रानी रासमणि स्कूल से उन्होंने शुरुआती पढ़ाई की फिर बंगवासी मॉर्निंग कालेज से बीएससी किया। कलकत्ता विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री लेने के बाद कुछ समय तक एक राष्ट्रीयकृत बैंक में नौकरी की। उन्होंने बताया कि 80 के दशक के शुरुआत में राजनीति में उनका प्रवेश हुआ। 1985 में कोलकाता के वार्ड नंबर 52 से कांग्रेस के टिकट पर पहली बार पार्षद बने। 1995 में इस वार्ड को महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया गया। इसके बाद साहा ने अपनी पत्नी सुनीता साहा को उम्मीदवार बनाया। 2015 के नगर निगम चुनाव में स्वर्ण कमल साहा के पुत्र संदीपन सहा इस वार्ड से उम्मीदवार बने और जीत हासिल की। वर्तमान में संदीप पार्षद होने के साथ-साथ नगर निगम के ई-गवर्नेंस का काम देखते हैं । 2009 के विधानसभा उपचुनाव में स्वर्ण कमल साहा को पार्टी ने कोलकाता की बउबाजार सीट से मैदान में उतारा। चुनाव में न सिर्फ साहा की जीत हुई बल्कि वाम शासन में पहली बार उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी माकपा उम्मीदवार की जमानत जब्त करवा दी। बाद में हुए सीटों के परिसीमन में बउबाजार सीट चौरंगी के साथ मिला दी गई। इसके बाद 2011 के चुनाव में स्वर्ण कमल साहा को पड़ोस की एंटाली सीट से उम्मीदवार बनाया गया। उन्होंने 2011 और 2016 के विधानसभा चुनावों में स्वर्ण कमल साहा ने बड़ी जीत हासिल की। राजनीति के साथ-साथ साहा सामाजिक गतिविधियों में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। अपने इलाके में होने वाले लगभग सभी धार्मिक एवं सामाजिक अनुष्ठानों में मुख्य पृष्ठपोषक की जिम्मेदारी निभाते हैं। गत विधानसभा चुनाव में एंटाली सीट पर भाजपा के सुधीर कुमार पाडेय को 14,682 वोट मिले थे। इस बार के चुनाव में भाजपा ने प्रियंक टिब्रेवाल को मैदान में उतारा है। क्षेत्र में हिंदी भाषी मतदाताओं की तादाद अच्छी खासी है। माना जा रहा है कि परिवर्तन की हवा चली तो प्रियंका के भाग्य खुल सकते हैं। दूसरी तरफ अल्पसंख्यक मतदाताओं का वोट बंटने की आशंका है। तृणमूल के साथ-साथ संयुक्त मोर्चा समर्थित आईएसएफ उम्मीदवार मोहम्मद इकबाल आलम भी अल्पसंख्यक मतों पर नजरें गड़ाये बैठे हैं। हालांकि साहा अल्पसंख्यक वोट बंटने की आशंका को सिरे से खारिज करते हुए कहते हैं कि इस बार और बड़े अंतर से उनकी जीत होगी। इस भरोसे की वजह के बारे में पूछने पर स्वर्ण कमल कहते हैं, “साल भर लोगों के पास रहता हूं। उनके मन-मस्तिष्क को समझता हूं। इससे ज्यादा क्या चाहिये? उल्लेखनीय है कि एंटाली में अंतिम चरण के तहत 29 अप्रैल को मतदान होगा।

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