June 17, 2021

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खूनी होली खेल रहे जीत के जश्न में डूबे तृणमूल कार्यकर्ता -संजयसेठ

रांची:- पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं पर हो रही हिंसा को लेकर भाजपा झारखण्ड प्रदेश के पूर्व नियोजित कार्यक्रम के तहत आज राँची के सांसद श्री संजय सेठ ने अपने आवास पर एक दिवसीय धरना दिया और फेसबुक लाइव के माध्यम से संवाद किया। इस दौरान श्री सेठ ने कहा कि पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम आए। निश्चित रूप से चुनाव परिणाम किसी की खुशी और किसी के लिए क्षणिक दुख का विषय होता है। खुशी में लोग जश्न मनाते हैं, जुलूस निकालते हैं, मिठाइयां बांटते हैं परंतु पश्चिम बंगाल का जश्न इन सबसे अलग है। चुनावी जश्न में चूर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता खून की होलियां खेल रहे हैं। श्री सेठ ने कहा कि परिणाम आने के बाद से ही जिस तरह से पश्चिम बंगाल में हिंसा शुरू हुई, वह लोकतंत्र पर बदनुमा काला धब्बा है। कैसे तृणमूल काँग्रेस के लोग अपनी जीत के जश्न में दूसरे दल के वोटरों को, भाजपा कार्यकर्ताओं को मारपीट कर रहे हैं, उनकी हत्याएं कर रहे हैं। और सबसे दुखद कि भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं के साथ जो अमानवीय कृत्य हो रहे हैं, वह कहने लायक है ही नहीं। सत्ता के नशे में कोई कैसे इतना चूर हो सकता है। उसे वैचारिक लड़ाई को सामाजिक लड़ाई में बदल दे रहा है। विचार अलग होने का मतलब ऐसा तो बिल्कुल ही नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कहा जाता है कि लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं होता परंतु पश्चिम बंगाल की स्थिति बिल्कुल अलग है। वहां के लोकतंत्र में सिर्फ और सिर्फ हिंसा ही दिख रही है। विश्वास ही नहीं होता कि रामकृष्ण परमहंस जैसे मनीषियों की तपोभूमि रही बंगाल, सुभाष चंद्र बोस जैसे वीर पुत्रों की जन्मभूमि रही बंगाल में कोई इस तरह के कृत्य कर सकता है। निश्चित रूप से यह राक्षसी प्रवृत्ति के लोग हैं, जो ऐसा कर रही हैं। ऐसे लोग मानव तो हो ही नहीं सकते। भाजपा कार्यकर्ताओं पर हो रहे अत्याचार, हत्या, हिंसा, आगजनी, लूटपाट इन सभी घटनाओं से मन बहुत व्यथित है। एक तो कोरोना ने हम सबको तोड़ने का काम किया है। हम अभी संभल ही रहे हैं। दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में सत्ता प्रायोजित हिंसा ने जो खेल किया है, वह रूह कंपाने वाला है। सबसे आश्चर्यजनक विषय यह है कि इस हिंसा पर देश के वह तमाम सेकुलरवादी लोग, तमाम निष्पक्ष लोग सब लोग चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने कहा कि जिन्हें इन मुद्दों पर मुखर होकर बोलना चाहिए। जिन्हें हर बात पर इस देश में असहिष्णुता दिखती है, जिन्हें लगता है कि यह देश अब रहने लायक नहीं, ऐसे सब लोग इस घटना पर खामोश हैं। सब अपनी-अपनी तरह से इसकी व्याख्या कर रहे हैं। मेरा साफ मानना है कि जिनको जैसे व्याख्या करनी है करिए परंतु कम से कम इंसानियत को तो शर्मिंदा मत करिए। इंसानियत को जिंदा रहने दीजिए। मानवता रहेगी, इंसानियत रहेगा, तो हम फिर से राजनीति करेंगे। हम फिर से चुनाव लड़ेंगे परंतु कुछ ऐसा मत करिए कि एक दूसरे का विश्वास ही सब पर से उठ जाए।
श्री सेठ ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस द्वारा प्रायोजित इस हिंसा में जिन्होंने अपना परिवार खोया, जिन्होंने अपना सब कुछ खोया, उन सब के प्रति में गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। मेरी पार्टी और हम सब ऐसे हर एक परिवार के साथ खड़े हैं, जो इस हिंसा का शिकार हुए हैं। आने वाले समय में इस हिंसा का जवाब वहां की जनता देगी, हमारी सरकार देगी ,इस देश के ही लोग देंगे।

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