January 22, 2021

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विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जनजातीय कला-शिल्प को भी विकसित करना चाहिये-राज्यपाल

सभी कुलपतियों के साथ की बैठक

रांची:- राज्यपाल-सह-राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि झारखण्ड जनजाति बाहुल्य राज्य है। यहाँ 32 प्रकार के जनजाति रहते हैं जिसमें आदिम जनजाति भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग क्रियाशील है लेकिन अपेक्षित गति से समृद्ध नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि जनजातियों की विशेषता है कि वे अपनी भाषा एवं संस्कृति के साथ रहना चाहते हैं। ऐसे में शिक्षा ग्रहण के लिए उनकी भाषा अहम है। विश्वविद्यालयों का अहम दायित्व है कि वे जनजातीय भाषाओं को बढ़ावा दें। प्रधानमंत्री द्वारा नई शिक्षा नीति के माध्यम से इन विषयों पर ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी सिर्फ डिग्री अर्जित न करें। उनमें असीम प्रतिभा हैं, उन्हें प्रखर करें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जनजातीय कला-शिल्प को भी विकसित करना चाहिये, उन्हें व्यवसायिक प्रषिक्षण दें ताकि उन्हें रोजगार प्राप्त हो सकें, वे पारंपरिक उद्योग-धंधे आरंभ कर सकें। राज्यपाल गुरुवार को झारखण्ड राज्य में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा की शिक्षा स्थिति के सन्दर्भ में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से समीक्षा कर रही थीं ।
राज्यपाल ने कहा कि विष्वविद्यालयों को चाहिये कि वे क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाओं में शोध के स्तर को उच्च और व्यापक बनाने की दिषा में समर्पित भाव से प्रयास करें। उन्होंने ने कहा कि नैक की टीम द्वारा उन्हें अवगत कराया गया कि जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के विद्यार्थियों को हिन्दी और अंग्रेजी भाषा की भी शिक्षा सुलभ करायें। उन्होंने कहा कि झारखण्ड में लगभग 26 प्रतिशत और देश में लगभग 10प्रतिशत जनजाति निवास करते हैं। उनको आगे बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय को भी सोचना होगा। राज्यपाल ने सभी विष्वविद्यालयों से रिक्तियों और पढ़ाई की माँगों पर विचार करते हुए कहा कि उनका प्रयास है कि सृजित पदों पर शीघ्र नियुक्ति हो जाय। राज्यपाल ने सभी कुलपतियों से जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विषय की पढ़ाई की जानकारी लेते हुए इन युवाओं के किन-किन रोजगारों में संलिप्तता के सन्दर्भ में पृच्छा की गई।
समीक्षा के क्रम में राज्यपाल से विष्वविद्यालयों द्वारा जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा के विभिन्न विषयों की पढ़ाई की माँगों और आवश्यकताओं के सन्दर्भ में अवगत कराते हुए शिक्षकों की नियुक्ति के लिए पहल करने का आग्रह किया गया। सभी विश्वविद्यालयों ने अपने यहाँ जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा के विभिन्न विषयों में संचालित पीजी, यूजी सर्टिफिकेट कोर्स की जानकारी दी। इस अवसर पर चांसलर पोर्टल के माध्यम से विश्वविद्यालयों में नामांकन हेतु आवेदन में आ रही समस्याओं के सन्दर्भ में भी परिचर्चा की गई। इसके साथ ही इंटरमीडिएट की पढ़ाई को डिग्री कॉलेज से पृथक् करने पर चर्चा करते हुए कहा गया कि वर्तमान में नोवेल कोरोना वायरस जैसी महामारी की परिस्थिति में तत्काल इसे पृथक् करना न्यायसंगत नहीं है। हालांकि इंटर की पढ़ाई का डिग्री कॉलेज से पृथक्करण आवश्यक है लेकिन अभी विषम परिस्थितियों के कारण जल्दबाजी में निर्णय नहीं लिया जा सकता है।
वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से आहुत इस समीक्षा बैठक में राज्यपाल के प्रधान सचिव-सह-प्रधान सचिव, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा शैलेष कुमार सिंह, उप निदेशक, उच्च शिक्षा विभाग, राँची विष्वविद्यालय के कुलपति-प्रतिकुलपति, विनोबा भावे विष्वविद्यालय, सिदो कान्हु विश्वविद्यालय, नीलाम्बर-पीताम्बर विष्वविद्यालय, कोल्हान विष्वविद्यालय, विनोद बिहारी महतो कोयलाचंल विष्वविद्यालय, डा0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी विष्वविद्यालय के कुलपति और एन.आई.सी के झारखण्ड प्रभारी मौजूद थे।

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