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एक नयी सुबह का

समाज में इन्हें सम्मान नसीब नहीं होता, पर इनकी दुआ बेकार नहीं जाती


मान्यता है कि जिस परिवार को किन्नर समाज दुआ देता है, वह खूब फलता-फूलता है
रांची:- समाज का ताना-बाना मर्द और औरत से मिलकर बना है, परंतु एक तीसरा जेंडर भी हमारे ही समाज का हिस्सा है। इनकी पहचान कुछ ऐसी है जिसे सभ्य समाज में अच्छी नज़र से नहीं देखा जाता। समाज से इन्हें सम्मान नसीब नहीं होता, लेकिन यह माना जाता है कि जिस परिवार को किन्नर समाज दुआ देता है, वह खूब फलता-फूलता हैं।
रांची के लटमा में रहने वाली नगमा किन्नर बताती है कि दीपावली में वह मां लक्ष्मी से यह प्रार्थना करती है कि सभी घर को संपन्नता दें, धन-धान्य से परिपूर्ण हो। वह प्रतिदिन अपने साथियों के साथ सुबह में तैयार होकर दुआ देने के लिए घर से निकल पड़ती हैं, परंतु कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन में इन्हें भी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। वहीं पेट्रोल-डीजल की कीमत में बढ़ोत्तरी और बढ़ती महंगाई से आम लोगों की तरह इन्हें भी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा हैं।
नगमा और उनकी साथी किन्नर विभिन्न मुहल्लों तथा दुकान-दुकान घूम कर लोगों को दुआएं देती है और जो भी खुशी से मिलता हैं, उससे उनका जीवन यापन होता हैं।
यह भी कहा जाता है कि पुराने दौर में लोग इनके नाम का पैसा निकालते थे और इनकी झोली भर देते थे। अब भी यह आम धारणा है कि किन्नरों का दिल नहीं दुखाना चाहिए और अपनी क्षमता के अनुसार इन्हें जरूर बख्शिश देना चाहिए।

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