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झारखंड राज्य में आदिवासी एवं अनुसूचित जाति के लिए उद्योग व्यापार के क्षेत्र में कुछ भी विशेष नहीं है :वैद्यनाथ मांडी


रांची:- ट्राइबल इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ( टिक्की ) झारखंड चैप्टर ने वर्तमान माहौल में आदिवासी उद्यमिता पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को शुक्रवार को पत्र के माध्यम से सवाल एवं ध्यान आकृष्ट कराया है l टिक्की, झारखंड चैप्टर के प्रदेश अध्यक्ष वैद्यनाथ मांडी ने मुख्यमंत्री के द्वारा झारखंड में औद्योगिक वातावरण की तैयारी को स्वागत योग्य बताया है l साथ ही, श्री मांडी ने कहा कि झारखंड सरकार नई औद्योगिक एवं निवेश नीति 2021 को लेकर काफी उत्साहित एवं गंभीर है निवेशकों को बेहतर सुविधाएं दी जा रही है l पुन: राज्य सरकार द्वारा दिल्ली में दो दिवसीय इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया जा रहा है l परंतु राज्य के आदिवासी युवा, उद्यमियों एवं उद्यमिता की उपेक्षा की जा रही है l राज्य के मुखिया का ध्यान आदिवासी उधमिता पर नहीं है l वही, कारोबार की राह आसान करने में झारखंड देशभर में पांचवें स्थान पर है परंतु आदिवासी उद्यमी एवं युवाओं की राह झारखंड में आसान नहीं है l नई सरकार को लगभग 2 साल हो चुका हैं ना ही आदिवासी उधमिता पर कोई नीति बनाई गई, ना ही पूर्व से संचालित योजनाओं का क्रियान्वयन सही ढंग से हो पाया l आज सरकार कहती है कि नई औद्योगिक एवं निवेश नीति 2021 में अनुसूचित जाति, जनजाति एवं महिलाओं के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया गया है परंतु यह प्रोत्साहन हमेशा से रही है जो न्याय संगत नहीं है l उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य में आदिवासी एवं अनुसूचित जाति के लिए उद्योग व्यापार के क्षेत्र में कुछ भी विशेष नहीं है ना ही किसी सरकार ने गंभीरता दिखाई है। सभी सरकारों ने खानापूर्ति का काम किया है l ऐसे माहौल में आदिवासियों को उधमिता से कैसे जोड़ा जा सकेगा, कैसे आदिवासी युवा उद्योग – धंधे लगाएंगे , जब राज्य के मुखिया को ही आदिवासी उद्यमिता के प्रति सकारात्मक रवैया नहीं हो। श्री मांडी ने प्रकाश डालते हुए बताया कि ट्राइबल चेंबर द्वारा नियमित तौर पर मौजूदा योजनाओं में संशोधन एवं नई योजनाओं के क्रियान्वयन का निवेदन करती रही है लेकिन राज्य सरकार इस पर कभी गंभीरता नहीं दिखाई l झारखंड प्रोक्योरमेंट पॉलिसी 2014 कागजों पर प्रदर्शित है। 7 साल बाद भी इसका क्रियान्वयन सभी विभागों में नहीं हो रहा है इसमें एसटी – एससी के लिए प्रावधान का भी अता-पता नहीं है । वर्ष 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास की अध्यक्षता में पारित आदेश एसटी – एससी को उद्योग लगाने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों में आधी कीमत में जमीन उपलब्ध कराने की योजना जिसे वर्तमान सरकार ने मार्च 2021 में स्वीकृति दी है उसकी अधिसूचना अभी तक जारी नहीं की गई है तो जमीन कैसे मिलेगी l मुख्यमंत्री की यह घोषणा कि 25 करोड़ की निविदा स्थानीय संवेदको को और एसटी – एससी को प्राथमिकता दी जाएगी भी कागजों पर है धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा है l मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना का भी यही हाल है अभी तक लाभुकों को ऋण प्राप्त नहीं हुआ है लाभुक द्वारा मार्जिन मनी जमा किए हुए भी 6 महीना बीत चुके हैं l वही, बिना गारंटर 50,000 ऋण के लिए भी आदिवासी युवाओं को एड़ी चोटी एक करवा दिया गया हैं l कई संबंधित अधिकारियों को तो योजनाओं का क्रियान्वयन कैसे होगा यही पता नहीं है l वहीं , योजनाओं के जटिलता से भी आदिवासी युवा एवं उद्यमी को लाभ नहीं मिलेगा l

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