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एक नयी सुबह का

किसी के जीवन में रोशनी लाने से बड़ा कोई काम नही-राज्यपाल


रांची:- राज्यपाल रमेश बैस ने कहा है कि अगर कोई लंबे समय से
अंधेरे में हो और उसे अचानक सबकुछ दिखने लगे, तो उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहता। किसी के जीवन में रोशनी लाने से बड़ा कोई काम नहीं। वे आज कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल द्वारा आयोजित आई डोनेशन अवेयरनेस कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मैं कश्यप हॉस्पिटल की मेडिकल डायरेक्टर डॉ भारती कश्यप और नेत्र प्रत्यारोपण की विशेषज्ञ डॉ. निधि गडकर कश्यप तथा उनकी पूरी टीम को धन्यवाद देना चाहता हूं, इन्होंने कठिन चुनौती के बावजूद 124 नेत्र प्रत्यारोपण किये हैं। इन विषम परिस्थितियों में भी कश्यप मेमोरियल आई हॉस्पिटल ने जो कार्य किये हैं, वह एक उदाहरण है। गवर्नर ने कहा कि विश्व के दृष्टिबाधित लोगों की एक बड़ी आबादी हमारे देश में रहती है। जो चिंता का विषय है। आंकड़ों के अनुसार 1.25 करोड़ लोग दृष्टिहीन हैं। इनमें से 30 लाख लोग नेत्र प्रत्यारोपण के माध्यम से दृष्टि प्राप्त कर सकते हैं। कार्निया का सही रख रखाव नहीं होने पर बहुत से कार्निया खराब हो जाते हैं। इस सिस्टम को और बेहतर करने की आवश्यकता है। उन्होंने नेत्रदान का निर्णय लेने वाले सभी लोगों और परिवारों का आभार प्रकट किया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण डॉक्टर बीपी कश्यप और धन्यवाद
ज्ञापन डॉक्टर विभूति कश्यप ने किया। इस अवसर पर विभिन्न नेत्रदाता परिवारों को गवर्नर और स्वास्थ्य मंत्री द्वारा सम्मानित भी किया गया।
नेत्रदान है सचमुच महान कार्य – स्वास्थ्य मंत्री
स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा कि नेत्रदान सचमुच एक महान काम है, क्योंकि ऐसे काम आत्मा से किए जाते हैं। आईडेक के कार्यक्रम में बोलते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि कोरोना काल में पूरे देश में नेत्रदान में 63प्रतिशत कमी आई और नेत्र प्रत्यारोपण में 52प्रतिशत कमी आई। पूरे देश में 27,075 की जगह मात्र 13 हजार नेत्र प्रत्यारोपण हुए, वैसे कठिन 2 साल से समय में 124 सफल नेत्र प्रत्यारोपण, वह भी नेत्र प्रत्यारोपण की अत्याधुनिक पद्धति के द्वारा, आयुष्मान भारत के द्वारा किया जाना कश्यप मेमोरियल आई बैंक एवं आई डोनेशन अवेयरनेस क्लब के लिए एक बहुत ही बड़ी उपलब्धि है। इसका फायदा गरीब मरीजों को मिल रहा है।

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