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मेहसी में लौंगान लीची के फलों को देख लीची उत्पादक किसानों में खुशी की लहर


मोतिहारी:- चम्पारण मे लीचीपुरम के नाम से विख्यात मेहसी में लौंगान लीची अपने फलों के साथ अंगड़ाई लेने लगी है। राजेन्द्र कृषि विश्वविधालय पूसा के अनुसंधान से विकसित लौगान लीची के पेड़ों पर लगे फलो को देख किसानो मे हर्ष व्याप्त है। आम तौर पर लीची का मौसम मई-जून का होता है,लेकिन सितम्बर माह में लौंगान लीची के पेड़ो पर लहलहाते फलों को देखने के लिए मेहसी ही नही बल्कि आसपास के प्रखंडो के किसान यहां पहुंचने लगे है।
पिछले कई वर्षो से लीची के फसल बर्बादी से निराश किसान इसे सकारात्मक संकेत मानते है। लीचीपुरम फ्रुटेग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के निदेशक सुदिष्ट नारायण ठाकुर ने बताया कि जैसा नाम है उसी के अनुरूप लौगान लीची के फलों का साइज़ है।आकार मे शाही लीची से थोडा छोटा लेकिन स्वाद मे लाजवाब है। इसका रंग लाल नहीं मटमैला है। उन्होंने कहा कि यह फल कई औषधीय गुणों से परिपूर्ण है।इसे डायबिटीज के मरीज भी खा सकते हैं। फिलहाल इस लीची को मेहसी प्रखंड के किसान सह लीचीपुरम फ्रुटेग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के निदेशक संजय कुमार लड्डू ने अपने बाग में लगाया है। इसके मांग को देखते हुए किसानों के बीच इसकी खेती के रकबा को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा।

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