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माहवारी के बारे में खुलकर चर्चा करने की जरूरत, जागरूकता के लिए हर स्तर पर हों उपाय


बोकारो:- समाहरणालय सभागार में उप विकास आयुक्त जय किशोर प्रसाद की अध्यक्षता में माहवारी स्वच्छता प्रबंधन (एमएचएम) पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। मौके पर अनुमंडल पदाधिकारी चास दिलीप प्रताप सिंह शेखावत, कार्यपालक अभियंता पेयजल एवं स्वच्छता चास एवं तेनुघाट, यूनिसेफ से विशेषज्ञ स्वर्णा राउत, कृष्ण मुरारी, डीपीएम जेएसएलपीएस श्रीमती अनिता केरकेट्टा, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी अविनाश कुमार आदि उपस्थित थे।
मौके पर उप विकास आयुक्त जय किशोर प्रसाद ने किशोरियोंल्-महिलाओं को केंद्रीत कर सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सभी संबधित योजनाओं को एक साथ लाकर आपसी समन्वय के माध्यम से माहवारी स्वच्छता प्रबंधन (एमएचएम) कार्यक्रम को सफलता पूर्वक लागू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज भी माहवारी स्वच्छता प्रबंधन को लेकर समाज में कई प्रकार की भ्रांतियां, अंध – विश्वाश आदि व्याप्त है। जिसको लेकर व्यापक जागरूकता लाने की आवश्यकता है। किशोरियों के साथ दृ साथ उनकी मां एवं घर कि अन्य महिलाओं को भी जागरूक करने पर बल देने को कहा। उन्होंने कार्यशाला में बताई गई बातों को नीचले स्तर तक ले जाने एवं महिलाओं-किशोरियों को जागरूक करने को कहा।
अनुमंडल पदाधिकारी चास दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने कहा कि माहवारी एक ऐसा विषय है जिसके संबंध में आज भी हमारे समाज में खुलकर बात नहीं की जाती है। भुग्तभोगी किशोरियां भी इस पर खुलकर बोलने में शर्माती हैं। जिससे इसके संबंध में लोगों का ज्ञान आधा – अधूरा ही है। इसका परिणाम यह है कि महिलाओं और किशोरियों को माहवारी के दौरान तमाम चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इस चुनौती से पार पाना आवश्यक है। इसके लिए जागरूकता और माहवारी स्वच्छता प्रबंधन (एमएचएम) महत्वपूर्ण है।
मौके पर यूनिसेफ की स्वर्णा राउत ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से माहवारी स्वच्छता प्रबंधन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जिले में जेएसएलपीएस, पेजयजल स्वच्छता, आइसीडीएस, स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायती राज आदि विभागों से समन्वय के साथ माहवारी स्वच्छता प्रबंधन को लागू किया जाएगा। मौके पर मध्य विद्यालय न्यू भागलपुर बेरमों की शिक्षिका अर्चना ने अपने अनुभवों को साझा किया। उनके द्वारा स्वच्छता विशेषकर माहवारी स्वच्छता प्रबंधन के तहत अपने स्कूल में अच्छा काम किया गया है।
कार्यशाला में माहवारी स्वच्छता प्रबंधन (एमएचएम) के संदर्भ में विस्तार से बताने के साथ कोरोना के दौरान माहवारी को लेकर किशोरियों-महिलाओं में होने वाली सामान्य चुनौतियों (सामान्य चुनौतियां- अपेक्षित प्रतिक्रिया) के संबंध में भी विस्तार से बताया गया।
कार्यशाला में सभी प्रखंडों के सीडीपीओ-महिला पर्वेक्षिका, कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की वार्डेन, महिला चिकित्सक, यूनिसेफ की जिला स्तरीय टीम आदि उपस्थित थे।

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