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गलती है तो मैनहर्ट मामले पर कार्रवाई करे हेमंत सरकार -रघुवर दास

रांची:- मैनहर्ट मामले पर पूर्व सीएम रघुवर दास ने कहा है कि सरकार इसपर बोले नहीं कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि सांच को आंच क्या। अगर गलती है तो सरकार स्वतंत्र है जांच कराने के लिए. कानूनी तरीके से पूरी निष्पक्षता के साथ जांच और कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 16 साल पुराना मामला है। इसके बीच राज्य में कई सरकारें आई और गई, लेकिन हेमंत सरकार में ही यह मामला तूल पकड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार उनके पूरे 5 साल के मुख्यमंत्री काल की भी जांच करा ले। मैनहर्ट मामले में अपने उपर लगे आरोप से रघुवर काफी परेशान लग रहे हैं। उनके चेहरे पर मैनहर्ट को लेकर बेचौनी साफ दिख रही है। रघुवर दास अपने मुख्यमंत्री काल में हुई गड़बड़ियों के आरोपों को मुस्कुरा कर सुन रहे थे। लेकिन जैसे ही मैनहर्ट का नाम आया. उन्होंने रिएक्ट किया और कहा कि बोलें नहीं गलती है तो कानून के मुताबिक कार्रवाई करें। गौरतलब है कि एसीबी की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि मैनहर्ट परामर्शी की नियुक्ति में अनियमितता बरती गयी थी। इस मामले में डीएसपी स्तर की जांच हो चुकी है। इसमें पाया गया है कि नियम और शर्तों में फेरबदल करते हुए मैनहर्ट को परामर्शी के रूप में नियुक्त कर दिया गया। इस मामले में जांच के दौरान 24 जून को तत्कालीन नगर विकास मंत्री रघुवर दास और आइएएस अधिकारी शशिरंजन को एसीबी ने नोटिस भेजा था। रघुवर दास की ओर से एसीबी को अपना पक्ष उपलब्ध कराया जा चुका है।
गौरतलब है कि मामला 2005 का है, जब रघुवर दास अर्जुन मुंडा की सरकार में नगर विकास मंत्री थे। एक कंपनी रांची शहर में सीवरेज और ड्रेनेज का डीपीआर बना रही थी। करीब 75 फीसदी डीपीआर बनाने के बाद कंपनी से काम वापस ले लिया गया। यह काम मैनहर्ट कंपनी को दे दिया गया। आरोप है कि मैनहर्ट को काम देने के लिए विभाग ने टेंडर की शर्तों का उल्लंघन किया। मामला विधानसभा में उठा। विधानसभा ने जांच के लिए एक कमेटी बनायी। इसमें सरयू राय, प्रदीप यादव और सुखदेव भगत सदस्य थे। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मैनहर्ट को काम देने में गड़बड़ी हुई है। साथ ही एक स्वतंत्र एजेंसी से जांच करने की सिफारिश की। लेकिन जांच नहीं हुई , फिर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 1 अक्तूबर 2020 को मामले की जांच एसीबी से कराने का निर्देश दिया।

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