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वीर कुंवर सिंह यूनिवर्सिटी आरा में सिंडिकेट की बैठक में एमबीए में हुई नियुक्तियों को किया गया निरस्त


आरा:- वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा के अंगीभूत एचडी जैन कॉलेज के प्राचार्य शैलेन्द्र ओझा के विवि के बीएड विभाग के प्रभारी प्राचार्य रहते बीएड नामांकन की राशि में हेर फेर के मामले में मुश्किलें बढ़ सकती है। सिंडिकेट की आयोजित बैठक में सिंडिकेट के सदस्यों ने जैन कॉलेज के प्राचार्य और विवि के बीएड विभाग के प्रभारी प्राचार्य रहते बीएड के नामांकन में गंभीर आरोप लगाये हैं।
उनपर आरोप है कि प्रभारी रहते शैलेन्द्र ओझा ने ऑनलाइन एडमिशन शुल्क जमा कराने के बजाय नियमों की अनदेखी करके प्रति छात्र 75 हजार रुपये नकद जमा कराए और बीएड के एडमिशन की जो राशि बैंक में जमा की गई वह वसूली गई राशि से 32 लाख रुपये कम पाई गई है। इस मामले को बड़ा बीएड नामांकन घोटाला मानते हुए सिंडिकेट सदस्यों ने सदन की बैठक में जोरदार हंगामा किया।
सिंडिकेट सदस्यों के कड़े रुख को देखते हुए बीएड नामांकन शुल्क में 32 लाख रुपये के हेर फेर के मामले की जांच के लिए कुलपति प्रो.राजेन्द्र प्रसाद को एक कमिटी गठित करनी पड़ी है। जांच समिति का संयोजक प्रतिकुलपति प्रो.सीएस चौधरी को बनाया गया है जबकि जांच समिति में देव वंश सिंह और वित्त पदाधिकारी सुशील कुमार यादव को सदस्य बनाया गया है।यह जांच समिति बीएड नामांकन शुल्क में हेरा फेरी की जांच कर अपनी रिपोर्ट कुलपति सौंपेगी।जांच रिपोर्ट के बाद जैन कॉलेज के प्राचार्य और बीएड विभाग के प्रभारी प्राचार्य की मुश्किलें बढ़ सकती है।
सिंडिकेट ने निवर्तमान कुलपति प्रो.देवी प्रसाद तिवारी द्वारा विज्ञापन निकाल कर एमबीए में तीन शिक्षकों की नियुक्ति को भी निरस्त कर दिया है।साथ ही सिंडिकेट ने पूर्व में बीएड विभाग के शिक्षकों और कर्मियों को बर्खास्त करने के फैसले को निरस्त करते हुए बीएड विभाग के सभी शिक्षकों व कर्मियों को पूर्व की स्थिति में बहाल कर दिया है।गुरुवार को दिनभर सिंडिकेट के इन फैसलों की चर्चा विवि के राजनैतिक,शैक्षणिक और प्रशासनिक गलियारों में चलती रही।

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