April 15, 2021

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पत्थलगड़ी आंदोलन फिर पकड़ने लगा है तूल

हाईकोर्ट के निकट पत्थलगड़ी की कोशिश विफल होने के बाद विधानसभा के ईद-गिर्द सुरक्षा बढ़ायी गयी

रांची:- झारखंड में एक बार फिर पत्थलगड़ी आंदोलन तूल पकड़ने लगा है। करीब डेढ़-दो वर्षों तक पत्थलगड़ी आंदोलन शांत रहने के बाद अचानक आदिवासियों का एक समूह फिर से पत्थलगड़ी आंदोलन में सक्रिय हो गया है।
वर्ष 2017-18 में खूंटी, सरायकेला, पश्चिमी सिंहभूम और गुमला जिले के आदिवासी बहुल इलाके से पत्थलगड़ी आंदोलन की शुरुआत हुई थी, लेकिन इस बार पत्थलगड़ी आंदोलन की शुरुआत सीधे राजधानी रांची से हुई है। विगत सोमवार 22 फरवरी को करीब 200 आदिवासियों का एक समूह अचानक झारखंड उच्च न्यायालय के निकट आ पहुंचा और पत्थलगड़ी करने की कोशिश की। लेकिन वहां तैनात पुलिस अधिकारियों ने समझाबुझा कर उन्हें शांत करा दिया है और उन्हें वापस भेज दिया। दूसरे दिन पत्थलगड़ी समर्थकों ने राजभवन जाकर राज्यपाल से भी मुलाकात की। साथ ही यह भी घोषणा की कि जल्द ही उनके द्वारा रांची में विधानसभा के नये भवन के निकट पत्थलगड़ी किया जाएगा।
विधानसभा के नये भवन के आसपास पत्थलगड़ी करने की घोषणा के बाद पूरे इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी गयी है। अभी विधानसभा का बजट सत्र भी चल रहा है, इस कारण क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू है। इसलिए इस बात की कम ही संभावना है कि पत्थलगड़ी समर्थक अपनी योजना में सफल हो जाएंगे।
इस बीच रविवार को सैकड़ों ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में रांची एयरपोर्ट के निकट पहुंचे और गैरमजरुआ जमीन को अपने कब्जे में ले लिया। यह भूखंड एयरपोर्ट थाना क्षेत्र के कूटे टोली गांव में है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना ग्रामसभा की अनुमति के पांच एकड़ के इस भूखंड को एक एनजीओ को आवंटित कर दिया गया है। पत्थलगड़ी समर्थकों का कहना है कि बिना ग्रामसभा की अनुमति के गांव की जमीन किसी संस्था को नहीं दी जा सकती। परंतु सरकार ने फर्जी ग्रामसभा की स्वीकृति दिखाकर गांव की गैरमजरुआ जमीन को एक एनजीओ को आवंटित कर दिया है।
गौरतलब है कि वर्ष 2017 के अगस्त में जब पत्थलगड़ी आंदोलन चरम पर था, तो खूंटी जिले के कई इलाकों में पत्थलगड़ी कर गांव का रास्ता बंद कर दिया गया था। इस सूचना पर जब मौके पर पहुंची पुलिसकर्मियों को भी ग्रामीणों ने बंधक बना लिया था और 25अगस्त 2017 को खूंटी के कांकी इलाके में पूरी तरह एसपी, डीएसपी, एसडीओऔर कई थाना प्रभारी समेत 200 पुलिसकर्मी बंधक रहे थे। अगले दिन डीआईजी और उपायुक्त के हस्तक्षेप के बाद उन्हें मुक्त कराया जा सका था। पत्थलगड़ी समर्थकों फरवरी 2018 में नक्सलियों के खिलाफ अभियान में निकले सीआरपीएफ की तीन कंपनियों को भी बंधक बना लिया था, वहां भी उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप से जवानों को मुक्त कराया गया था। इस आंदोलन के समर्थकों ने तत्कालीन सांसद कड़िया मुंडा के घर से हाउस गार्ड के तीन और पुलिस के एक जवान का हथियार समेत अपहरण कर लिया। इस घटना के करीब एक सप्ताह केबाद पुलिस अगवा जवानों को मुक्त करा सकी। इस आंदोलन का तार गुजरात से जुड़े होने की बात सामने आयी थी।

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