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प्राइवेट स्कूल के संचालकों ने वित्तमंत्री को सौंपा ज्ञापन, रास्ता निकालने का आग्रह

रांची:- नेशनल प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने आज रांची में वित्त तथा खाद्य आपूर्ति डॉ0 रामेश्वर उरांव से मुलाकात कर अपनी मांगों और समस्याओंसे अवगत कराया। पासवा के प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे के नेतृत्व में एसोसिएशन के सदस्यों ने वित्तमंत्री से मुलाकात के दौरान यह आग्रह किया कि डेढ़ साल से बंद निजी स्कूलों में पठन-पाठन फिर से शुरू कराने और स्कूल खोलने के लिए कोरोना गाइडलाइन के तहत किसी मैकेनिज्म पर अब राज्य सरकार को विचार करना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने वित्तमंत्री को बताया कि पूर्ववर्ती रघुवर दास सरकार में वर्ष 2019 में देशभर में लागू हाने के इतर राज्य में प्राइवेट स्कूलों को मान्यता देने को लेकर जो संशोधन किया गया था,उसे रद्द किया जाना चाहिए।
वित्तमंत्री को शिष्टमंडल के सदस्यों ने बताया कि राज्य के सभी निजी विद्यालयों को लॉकडाउन की अवधि में कई प्रकार के संकटों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य में संचालित करीब 45 हजार निजी स्कूलों में पड़ने वाले बच्चों और इन स्कूलों में कार्यरत लाखों शिक्षकों, शैक्षणिक कर्मियों के समक्ष संकट की स्थिति उत्पन्न हो गयी है। चंद बड़े प्राइवेट स्कूलों को छोड़ कर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अवस्थित इन निजी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब एवं मध्यग वर्ग के बच्चों के अभिभावक सिर्फ 200 से 250 रुपये मासिक शुल्क देते हैं, इसी से शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन-मानदेय दिया जाता है। लेकिन डेढ़ वर्षों से स्कूल बंद होने के कारण इन स्कूलों में फीस आना पूरी तरह से बंद हो गयी है, जिससे निजी स्कूल संचालकों की परेशानियां बढ़ गयी है। वहीं सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन भुगतान पर हजारों रुपये खर्च हो रहे है, उन स्कूलों के पठन-पाठन को लेकर कोई सवाल नहीं उठा रहा है, सिर्फ निजी स्कूलों के खिलाफ ही एक साजिश के तहत माहौल बनाया जा रहा है।
एसोसिएशन के प्रमख मांगों आरटीई अधिनियम में बीपीएल छात्रों को पढ़ाने की अनुमति को लेकर अप्रैल 2019 में राज्य सरकार द्वारा किये गये संशोधन को वापस लेने की मांग की गयी। साथ ही कोरोना काल के लिए राहत के रूप में अनाज, सहयोग राशि इत्यादि राहत पैकेज घोषित करने का आग्रह किया गया। इसके अलावा पिछले 16 महीने से लगातार बंद पड़े विद्यालयों की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है। इसलिए बंद पड़े विद्यालयों के सभी बैंक लोन, बिजली बिल, वाहनों के ईएमआई, टैक्स, बीमा, बैंकों में वाहनों की किस्तों एवं किराए के मकानों में चल रहे विद्यालय भवनों के किराए से तत्काल राहत देने का आग्रह किया गया।
वित्तमंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया है कि उनकी मांगों को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विचार विमर्श किया जाएगा एवं कैबिनेट में भी चर्चा की जाएगी।

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