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रूपा तिर्की मौत की जांच अविलंब सीबीआई को सौंपा जाए-बाबूलाल मरांडी

मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर कहा परिजनों को स्थानीय पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं

रांची:- भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने साहेबगंज की महिला थाना प्रभारी रूपा तिर्की मौत मामले में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को चिट्ठी लिखकर अविलंब सीबीआई जांच की मांग किया है। उन्होंने चिट्ठी के मार्फत कहा है कि पिछले 3 मई को साहेबगंज महिला थाना प्रभारी में पदस्थापित दारोगा रूपा तिर्की की संदेहास्पद मौत के बाद मृतका के परिजनों ने साहेबगंज में मीडिया के सामने बयान देकर कहा है कि रूपा तिर्की ने आत्महत्या नही की यह किसी साजिश का शिकार हुई है एवं इस बाबत परिजनों ने साहेबगंज थाना में प्राथमिकी भी दर्ज कराई, जिसमेंरूपा तिर्की से लगातार सम्पर्क रखनेवाली दो महिला पुलिस अवर निरीक्षक जो बेचमैट भी है एवं एक झामुमो के सचिव पंकज मिश्रा जो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विधायक प्रतिनिधि भी हैं, पर आरोप लगाया गया है। इस दिशा में स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा जाँच के नाम पर खानापूर्ति कर इसे आत्महत्या का रूप देकर मामले के पटाक्षेप का प्रयास किया जा रहा है।
स्थानीय पुलिस द्वारा मृतका रूपा तिर्की के आत्महत्या मामले में मृतका के मित्र एवं बेचमैट शिव कुमार कनौजिया को गिरफ्तार कर साजिश, षडयंत्र एवं हत्या की आशंका वाले मामले से ध्यान भटकाया जा रहा है, जो न सिर्फ मृतका के परिजनों बल्कि पूरे आदिवासी समाज समेत किसी के गले नहीं उतर रहा है और सारे लोग एक स्वर में रूपा तिर्की की हत्या किए जाने का संदेह जता रहे हैं।
श्री मरांडी ने कहा कि पूरे राज्य में इस मामले को लेकर विभिन्न संगठनों एवं राजनीतिक दलों ने इस कांड की जाँच केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो से कराने की माँग की है जिससे इस मामले की सच्चाई जनता के सामने आ सके और परिवार वालों को भी जाँच पर भरोसा हो सके। मृतका के परिजनों को स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही जाँच पर भरोसा नहीं है एवं लगातार ब्.ठ.प्. जाँच की माँग कर रहे हैं। इस बाबत कई आदिवासी संगठनों ने विभिन्न तरीके से आपको संदेश भेजकर एवं मिलकर इस मामले की जाँच ब्.ठ.प्. से कराने का अनुरोध किया है एवं अभी तक कई संगठनों ने इसकी जाँच सीबीआई से कराने हेतु रोज ब रोज धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। सत्ताधारी दल के कई विधायकों ने भी इस मामले में आपसे मिलकर सीबीआई से जाँच कराने का अनुरोध किए हैं। चूँकि यह मामला एक होनहार महिला पुलिस पदाधिकारी के मौत से जुड़ा है एवं लोगों की संवेदनाएँ इससे जुड़ी हुई है तो बेहतर होता कि बिना देर किए इस मामले की जाँच सीबीआई से कराने का आदेश देते ताकि मृतका के परिजनों का भरोसा राज्य सरकार पर बना रहे और यह नैसर्गिक न्याय का तकाजा भी है। वैसे भी न्याय का यह स्थापित नियम भी है कि न्याय हो तो न्याय होता दिखना भी चाहिए। अविश्वास की वजह पर तो उपर के न्यायलय पीड़ित एवं अभियुक्त का भरोसा कायम रखने के लिए नीचे सुनवाई करने वाले न्यायालय तक को परिवर्तित कर देते हैं। यहाँ तो विश्वास की कमी के चलते प्रभावित पक्ष और पूरा समाज राज्य की पुलिस के बदले सिर्फ सीबीआई से जांच की माँग को लेकर उद्धेलित हैं। ऐसे में आपको यह मामला सीबीआई को सौंपने में क्या दिक्कत और मजबूरी है? यह समझ से परेहै। उन्होंने कहा कि विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं इनके परिजनों द्वारा लगातार इस मामले की ब्.ठ.प्. जाँच की माँग को देखते हुए मेरा भी आपसे अनुरोध होगा कि इस मामले की जाँच अविलम्ब ब्.ठ.प्. से कराने का आदेश दिया जाय ताकि परिजनों एवं इस मांग को लेकर आन्दोलित आदिवासी संगठनों का भरोसा सरकार पर बना रहे। यह आपका कर्त्तव्य है और दायित्व भी है। ध्यान रहे, समय बीतने के साथ ही सबूतों के नष्ट हो जाने की संभावना के मद्देनजर इसमें जरा भी विलंब उचित नहीं है।

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