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पेयजल परियोजनाओं के संचालक की जिम्मेवारी सरकार अपने हाथ में लेगी

नगर विकास मंत्री ने विधायक सरयूराय को दी जानकारी

रांची:- शहरी पेयजल परियोजनाओं के परिचालन एवं देखरेख की ज़िम्मेदारी अब राज्य सरकार अपने हाथ में लेगी और इसकी सतत निगरानी करेगी. नगर विकास विभाग ने इस दिशा में कार्य आरम्भ कर दिया है. सरकार पेयजल परियोजनाओं के परिचालन एवं देखरेख करने के लिये आउटसोर्सिंग पर संवेदक नियुक्त करने की नीति में बदलाव करेगी ताकि नागरिकों को संतुष्टि मिल सके और वाजिब शुल्क देने वालों को शुद्ध पेयजल मिल सके. साथ ही उपभोक्ताओं के घरों का होल्डिंग नम्बर नहीं होना पेयजल का कनेक्शन लेने में बाधा नहीं बनेगा. यह जानकारी नगर विकास विभाग के सचिव विनय कुमार चौबे ने आज जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय को दी.
श्री राय ने आज श्री चौबे के समक्ष जमशेदपुर पूर्वी की मोहरदा पेयजल परियोजना और जमशेदपुर पश्चिमी की मानगो पेयजल परियोजना के लचर परिचालन और इनसे उपभोक्ताओं को गुणवत्ता युक्त पेयजल की आपूर्ति नहीं होने की समस्या रखा और कहा कि निश्चित समय पर पेयजल लोगों के घरों तक नहीं पहुँच रहा है. पेयजल परियोजनाओं की संरचनात्मक खड़ा करने में करोड़ों रूपये खर्च हो जा रहे हैं. परंतु लोगों को समय पर पर्याप्त शुद्ध पेयजल नहीं मिल रहा है, जो इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य है.
जमशेदपुर पूर्वी के विधायक ने नगर विकास विभाग के सचिव को बताया कि नगर विकास विभाग द्वारा जनवरी 2021 में परिचालित नई नीति की कंडिका-8 में अंकित प्रावधान की आड़ लेकर जुस्को ने जल संयोजन करने के लिये आवेदकों से घरों का होल्डिंग्स नम्बर माँगना शुरू कर दिया है. सर्वविदित है कि जो बस्तियाँ 2005 में टाटा लीज़ से अलग की गईं उन्हें सरकार ने होल्डिंग नम्बर आजतक नहीं दिया है. फिर उन्हीं बस्तियों में पानी का कनेक्शन देने के लिये होल्डिंग को अनिवार्य बनाने का क्या तुक है ? सरकार या तो टाटा लीज़ से अलग हुई बस्तियों एवं वर्षों से सरकारी ज़मीन पर बसी बस्तियों के घरों को होल्डिंग नम्बर दें या उन्हें होल्डिग नम्बर के बिना पेयजल का कनेक्शन दे. विभागीय सचिव ने आश्वस्त किया कि होल्डिंग नम्बर के बिना भी पेयजल कनेक्शन देने की व्यवस्था होगी. इस बारे में जेएनएसी ने भी सरकार के पत्र लिखा है.

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