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दीपावली पर ब्रजभूमि के मन्दिरों के दर्शन से खुलता है मोक्ष द्वार


मथुरा:- ब्रजभूमि में ठाकुर के श्रीचरणों में दीपदान करने का विशेष महत्व होने के कारण छोटी दीपावली से ही मथुरा में तीर्थयात्रियों का जमघट लग जाता है।
वैसे तो ब्रज के मन्दिरों में ठाकुर के श्रीचरणों में वर्ष पर्यन्त दीपदान किया जाता है लेकिन कार्तिक मास में बांकेबिहारी मन्दिर वृन्दावन एवं गोवर्धन के दानघाटी एवं मुखारबिन्द मन्दिर में रोज हजारों दीपक ठाकुर की सेवा में अर्पित किये जाते हैं।
बांकेबिहारी मन्दिर के सेवायत आचार्य शशांक गोस्वामी ने बताया कि दीपावली पर मन्दिर में दीपक जलाना एक प्रकार से ‘आराधना उत्सव’ है जिसमें बिहारी जी महराज के सामने स्वयं का जीवन ज्योतिर्मय करने की आराधना ठाकुर से की जाती है। इसी प्रकार की मनोकामना के साथ भक्त गोवर्धन के दानघाटी मन्दिर एवं मुकुट मुखारबिन्द मन्दिर में भी दीपदान करते हैं।
छोटी दीपावली को नरक चौदस भी कहते है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने दुराचारी नरकासुर राक्षस का वध कर सोलह हजार एक सौ कन्याओं को उसके बंदीगृह से मुक्त कर उन्हें सम्मान दिया था।
ब्रज संस्कृति एवं ब्रजभाषा के परम विद्वान रामानन्द आश्रम के महन्त शंकरलाल चतुर्वेदी ने इस दिन के व्रत और पूजा के संबंध में बताया कि राजा रन्तिदेव ने अनजाने में भी कभी कोई पाप नही किया था फिर भी जब यम के दूत उन्हें लेने आ गए तो उन्हें आश्चर्य हुआ। उन्होंने उनसे एक वर्ष की मोहलत मांगी थी क्योंकि उन्होंने कोई पाप नही किया था। इस पर यमदूतों ने कहा कि एक बार उनके द्वार से एक भूखा ब्राह्मण लौट गया था।

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