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सरकारी मदद की आस के लिए तरस रही विधवा सोमारी तिर्की को जिला प्रशासन ने दिया मदद का भरोसा


पति के जाने के बाद बच्चों समेत थी दाने-दाने को मोहताज
चतरा:- झारखंड बनने के बाद से ही यह उम्मीद जताई जा रही थी कि गांव के गरीब अंतिम व्यक्ति तक सभी जरूरी सुविधाएं सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। लेकिन इसके विपरीत चतरा जिला के नक्सल प्रभावित प्रतापपुर प्रखंड के हरहद गांव के पुरनाडीह टोला की सोमारी तिर्की अपने दो बच्चों के साथ आज भी सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए तरस रही है। हैरानी की बात यह है कि सरकारी तंत्र का नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त साबित हो रहा है। हालांकि चतरा के डीडीसी सुनील कुमार सिंह ने कहा है कि विधवा महिला सोमारी तिर्की को बाबा साहेब अंबेडकर योजना के तहत आवास, विधवा व राशन कार्ड एक सप्ताह के अंदर उपलब्ध करा दिया जाएगा और इस मामले में बरती गई लापरवाही के मद्देनजर संबंधित पंचायत के पंचायत सेवक से स्पष्टीकरण भी मांगा जाएगा।
आंखों में बेबसी और चेहरे पर उदासी के साथ यह सोमारी तिर्की वर्ष 2020 में अपने पति सुधीर उरांव को खोने के बाद अब दाने-दाने के लिए विवश हैं। चतरा जिला से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर जिले के उग्रवाद प्रतापपुर प्रखंड के हरहद गांव के पुरनाडीह टोला की सोमारी तिर्की अपने दो मासूम बच्चों के साथ रहती है। वर्ष 2020 में अपने पति को खो चुकी सोमारी तिर्की अब दाने-दाने को मोहताज हैं। उनके दो मासूम छोटे-छोटे बच्चे हैं जिनका भरण-पोषण अब बमुश्किल हो रहा है। गांव के लोगों के द्वारा अनाज दिए जाने के बाद ही इनके घर का चूल्हा जलता है। सबसे हैरानी की बात है कि इस पंचायत के मुखिया और ना ही पंचायत सेवक को इस बात की भनक है। सोमारी तिर्की बेबस और लाचार होकर कहती है कि हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री हैं और कहते हैं कि आदिवासियों की सरकार है। लेकिन ठीक इसके विपरीत 2020 में विधवा होने के बावजूद आज तक न तो राशन कार्ड मिला है न ही विधवा पेंशन और न हीं आवास की योजना मिल पाई है।
गांव की दूसरी महिलाओं का कहना है कि वास्तव में यह महिला आर्थिक तंगी का सामना कर रही है। गांव में किसी तरह मजदूरी कर अपना जीवन-यापन कर रही है। हालांकि आसपास के लोगों के द्वारा सहयोग किया जाता है और अनाज या अन्य सुविधाएं दी जाती है तभी इनके घर के बच्चे को खाना नसीब हो पाता रहा है।
दूसरी तरफ चतरा के डीडीसी सुनील कुमार सिंह ने कहा है कि सोमारी तिर्की को एक सप्ताह के अंदर राशन कार्ड व अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएगी। उन्होंने अपने ही तंत्र पर भी सवाल खड़ा किया।उन्होंने बताया कि पंचायत सेवक व संबंधित कर्मी को भी बैठक कर इस मामले में जानकारी ली जाएगी।
लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि सरकार अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने के दावे व दिखावा तो जरूर करती है। लेकिन शायद धरातल पर आते-आते उनकी बातें और योजनाए दोनों दम तोड़ जाती है, जो कि वर्तमान व्यवस्था के लिए यह एक गंभीर सवाल खड़ी करती है।

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