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मुख्यमंत्री का मगही, भोजपुरी, अंगिका व मैथिली को स्थानीय भाषा की सूची से हटाने का निर्णय ऐतिहासिक : सुजीत कुमार


क्षेत्रीय जनजाति भाषा की सूची से बांग्ला, उड़िया व उर्दू को भी हटाया जाए
रांची:- खोरठा साहित्य सांस्कृतिक परिषद के केंद्रीय सचिव सुजीत कुमार ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा मगही, भोजपुरी, अंगिका और मैथिली को स्थानीय भाषा की सूची से हटाने का स्वागत किया है और कहा है कि मुख्यमंत्री का यह निर्णय झारखंड की भाषा संस्कृति और सभ्यता को बचाने की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय है और इसका स्वागत राज्य भर में रहने वाले आदिवासी और मूलवासियों को ऐतिहासिक तरीके से करना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से क्षेत्रीय व जनजाति भाषा की सूची से बांग्ला, उड़िया व उर्दू को भी हटाने की मांग की है और कहा है कि यह भाषा दूसरे राज्य की राजभाषा है। उन्होंने कहा कि भोजपुरी, अंगिका, मगही व मैथिली झारखंडी की भाषा बिल्कुल ही नहीं है। इन भाषाओं को यहां मान्यता देने से दूसरे राज्य में रहने वाले इस भाषा वासियों की संख्या यहां बढ़ेगी और वर्चस्व भी बना रहेगा। इसका नुकसान यहां के आदिवासी और मूलवासियों को होगा। झारखंड की आदिवासी व मूलवासी की भाषा संस्कृति अत्यंत गौरवशाली है इसका हम सब को ध्यान रखना चाहिए। साथ ही झारखंड के क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषा खोरठा, कुरमाली,नागपुरी, पंचपरगनिया ,मुंडारी, हो, कुडुख, खड़िया व संथाली को संरक्षित करने की जरूरत है।

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