April 18, 2021

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श्रीराम मंदिर का निर्माण राष्ट्र गौरव का निर्माण साबित होगा

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गाजीपुर:- अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्म स्थली पर बनने वाले भव्य श्रीराम मंदिर के लिए सिद्धपीठ हथियाराम मठ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज ने अपने शिष्य समुदाय के सहयोग से आरएसएस प्रांत प्रचारक रमेश जी को एक करोड़ 1लाख 1हजार 101 रुपए का समर्पण राशि सौंपा।
सिद्ध पीठ हथियाराम मठ पर महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति जी के निर्देश पर सिद्धपीठ से जुड़े क्षेत्र के शिष्य श्रद्धालु उपस्थित हुए। जहां उन्होंने आरएसएस काशी प्रांत प्रचारक रमेश जी को उक्त धनराशि भेंट की । महामंडलेश्वर ने कहा कि पवित्र कार्य में दिया गया सहयोग सिद्धकारी होता है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का मंदिर अयोध्या में वर्षों से लंबित है। जिसके भव्य भवन निर्माण की सहयोग प्रक्रिया में 50 करोड़ हिंदुओं सहित अन्य समाज के लोगों ने समर्पण राशि भेंट किया। यही हमारे राष्ट्र का गौरव है। श्रीराम मंदिर का निर्माण राष्ट्र गौरव का निर्माण है।
उन्होंने भगवान राम के बारे में प्रकाश डालते हुए कहा कि जैसे शहद में मधुमक्खी रमण करती है लेकिन मधुमक्खी के गुण उसके मिठास में रहती है। उसी तरह गुरु भी राम जैसे मिठास से निकलने का नाम नहीं लेते। ऐसे तत्वों का नाम है राम। भारत का सत्य सनातन धर्म है । राम जिसकी मूर्ति को ही भगवान की मूर्ति के रूप में देखें। जिसकी चर्चा रामचरितमानस में भी उल्लेखित है।
उन्होंने कहा कि मैं हिंदू ही नहीं हिंदू धर्माचार्य भी हूं। सनातन धर्म में सृष्टि निर्माण काल से ही सन्त महात्माओं द्वारा कपड़े की झोली में माला को रखकर राम राम जपा जाता है। ऐसे में अगर राम मंदिर निर्माण के लिए धर्माचार्यों द्वारा भी कुछ किया जाए तो यह उनके लिए सौभाग्य की बात है। सन्त समाज के सहयोग से एक मुट्ठी धनराशि एकत्रित करते हुए उन्होंने समर्पित किया। जिससे अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण कार्य में शामिल होना बताया। इस अवसर पर सिद्धपीठ के जुड़े हुए गाजीपुर,मऊ, चंदौली, बलिया व वाराणसी जनपदों के मनिहारी, सकरारी, कोहड़ा, बेलहरा, कटघरा, मानपुर, मेढवा सहित तमाम गांव के शिष्य श्रद्धालु उपस्थित थे ।काशी प्रांत प्रचारक रमेश जी ने कहा कि श्रीराम जन्म भूमि भव्य मन्दिर निर्माण में पूरे प्रदेश में सिद्धपीठ में भव्य आयोजन द्वारा संदेश गया जो राम जी के मंदिर से जुड़ा है। ऐसे पवित्र कार्य से जुड़कर सब को धन्य किया। श्रीराम आस्था व विश्वास के प्रतीक हैं। आज पूरे देश में जो प्रचार हुआ है यह अभियान धन संग्रह का नहीं बल्कि जन संग्रह का अभियान था।
यह कार्य राम जी से जोड़ने का अभियान ही नही बल्कि ऊंच-नीच के भेदभाव दूर करने का अभियान था। ऊँची अट्टलिकाओं व झोपड़ी में रहने वाले की दूरी को भी मिटाने का लक्ष्य था। पूरा वातावरण राम मय हो रहा है । राम मंदिर का निर्माण भव्य निर्माण भगवान राम की कृपा से हो रहा है। यह श्री राम की कृपा से हो रहा है। जब राम का चित्र व चरित्र हमारे अंदर होगा तभी भव्य राष्ट्र निर्माण की कल्पना साकार होगी व भारत पुनः विश्व गुरु बनेगा।
राम के चरित्र के अनुसरण करने से ही राम राज्य होगा या राम के संस्कार से राम राज्य भी होगा। राम के यहां कोई भेदभाव नहीं है। भगवान राम ने दुश्मन खेमे से आए विभीषण को भी सम्मान दिया था जिसे लाने पर ही रामराज्य पूरा हुआ। राम मंदिर के भूमि पूजन नहीं था बल्कि विश्व गुरु बनने के लिए भूमि पूजन रहा।
मंदिर पूरा होने पर भारत जगतगुरु के लिए माना जाएगा। यह अभियान दुनिया में भारत के जगतगुरु होने का सपना पूरा करने के लिए था।

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