May 13, 2021

अनावरण न्यूज़

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विवि में सेल्फ फायनेंशियल कोर्स की राशि का हिसाब नही

आरा:- वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा के विभिन्न अंगीभूत कॉलेजो में चल रहे स्व वित्त पोषित पाठ्यक्रमो में बड़े पैमाने पर आर्थिक लूट की बात सामने आने के बाद विवि प्रशासन ने सभी अंगीभूत कॉलेजो को पत्र भेजकर इस संबध में आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। विश्वविद्यालय के अंगीभूत कॉलेजो में स्व वित्त पोषित पाठ्यक्रमो में छात्र छात्राओं से शैक्षणिक और अन्य शुल्क के मद में ली जाने वाली राशि का कोई हिसाब नही होने और न ही इन शुल्क से प्राप्त राशि का अंकेक्षण कराने के बाद विवि प्रशासन ने पत्र भेजकर राशि के आय व्यय की सूचनाएं मांगने की कार्रवाई की है। विवि के कई महत्वपूर्ण अंगीभूत कॉलेजो में बीबीए,बीसीए,बायोटेक्नोलॉजी,फिश एंड फिशरीज,फैशन डिजाइनिंग जैसे कई कोर्स चलाये जा रहे हैं। इन पाठ्यक्रमो में नामांकन के लिए प्रति सेमेस्टर मोटी राशि की वसूली की जाती है।इस राशि से विभाग को एक बड़ी राशि प्राप्त होती है | विवि ने इस बात को गंभीरता से लिया है कि ऐसे स्व वित्त पोषित पाठ्यक्रमो से सम्बंधित विभागों में एकत्र की गई राशि की लूट में कहीं न कही सम्बन्धित कॉलेजो के प्राचार्य और पाठ्यक्रम के डायरेक्टर शामिल हैं और इसीलिए इस शुल्क की राशि का कोई हिसाब नही है। इस शुल्क के ऑडिट भी नही कराए जाते हैं। सबसे बड़ी बात तो ये है कि विवि से इन सब वित्त पोषित कोर्स की पढ़ाई के लिए स्वीकृति और संबन्धन तो ले लिया जाता है और छात्रो का भारी संख्या में नामांकन कर पैसे भी वसूल लिए जाते हैं किंतु छात्रों की पढ़ाई और प्रयोगशाला के लिए न ही मानक के अनुसार शिक्षक की नियुक्ति की जाती है और न ही प्रयोगशाला में केमिकल व उपकरण की खरीददारी ही की जाती है। नतीजा हुआ है कि भारी भरकम शुल्क देकर नामांकन कराने वाले छात्र छात्राओं को पढ़ाई के नाम पर गोरखधंधे चलाये जाने की बात समझ मे आई तो छात्रो ने बाद में इन पाठ्यक्रमो में कई कॉलेजो में नामांकन लेना भी छोड़ दिया और नतीजा हुआ है कि महाराजा कॉलेज आरा में बायोटेक्नॉलोजी की पढ़ाई बन्द हो गई है और विभाग में ताले लटक गए हैं। एसबी कॉलेज आरा में फिश एंड फिशरीज की पढ़ाई बन्द हो चुकी है।महन्थ महादेवानन्द महिला कॉलेज आरा में फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई बन्द हो गई है। ऐसे कई कॉलेजो में कई पाठ्यक्रमो की पढ़ाई तो बन्द हो गई है लेकिन इस पाठ्यक्रम में नामांकन से वसूले गए पैसे का कोई हिसाब नही है।इन पैसों की बड़े पैमाने पर लूट हुई है।अब विवि ने शुल्क और अन्य तरह की कई जानकारियां इन कॉलेजो के प्राचार्यो से मांगी है।

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