June 24, 2021

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आनंदमार्ग के संस्थापक आंनन्दमूर्ती जी की 100 वीं जयंती सादगीपूर्वक मनाया गया

ठाकुरगंज :- आनंदमार्ग परिवार ने वैशाखी पूर्णिमा के मौके पर आनंदमार्ग के संस्थापक आंनन्दमूर्ती जी की 100 वीं जयंती लोकडाउन के दौरान गाइड लाइन का पालन करते हुए सादगीपूर्वक मनाया। आनन्दमार्ग के जिला भुक्ति प्रधान सुमन भारती ने बताया कि लॉकडाउन को देखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रख सभी अनंदमार्गी एक जगह एकत्रित न होकर अपने अपने घरों में ही आंनन्दमूर्ती जी की जयंती मनाई। फौदार बस्ती स्थित आनन्द मार्ग जागृति भवन के प्रार्थना कक्ष में श्री श्री आनन्दमूर्ति जी के तैलीय चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।वहीं दूसरी ओर सभी आनन्दमार्गियों ने अपने घरों में सुबह पांचजन्य तथा 06:07 बजे जन्मोत्सव के बाद प्रभात संगीत,साधना,आनन्द वाणी पाठ किया ।दोपहर के वक्त नारायण सेवा के तहत लोगों को भोजन कराया गया।इस मौके पर उन्होंने बताया कि श्री श्री आंनन्दमूर्ती जी का जन्म 1921 में वैशाखी पूर्णिमा के दिन बिहार के जमालपुर (मुंगेर)में एक साधारण परिवार में हुआ था। परिवार का दायित्व निभाते हुए सामाजिक समस्याओं के कारण का विश्लेषण उनके निदान ढूंढने एवं लोगों को योग साधना आदि की शिक्षा देने में अपना समय देने लगे। सन 1955 में उन्होंने आनंद मार्ग प्रचारक संघ की स्थापना की। श्री श्री आनंदमूर्ति जी ने समझा कि जिस जीवन मूल्य भौतिकवाद को वर्तमान मानव अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर एक मनुष्य को शारीरिक मानसिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में विकसित होने का अधिकार है। कोई भी घृणा योग्य नहीं।किसी को शैतान नहीं कह सकते। मनुष्य तब शैतान या पापी बनता है। जब उपयुक्त परिचालन पथ निर्देशन का अभाव होता और वह अपनी कुप्रवृत्तियों के कारण बुरा काम कर बैठता है ।यदि उनकी इन कुप्रवृतियों को सूप्रवृत्तियों की ओर ले जाए तो वह शैतान नहीं रह जाएगा।

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