January 25, 2021

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तेजस्वी की पहचान अंशकालिक राजनीतिज्ञ, पूर्णकालिक पर्यटक की बनती जा रही : जदयू

JDU

पटना:- जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने राष्ट्रीय जनता दल और बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनकी पहचान अंशकालिक राजनीतिज्ञ और पूर्णकालिक पर्यटक के रूप में बनती जा रही है। जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने रविवार को यहां कहा कि नेता प्रतिपक्ष श्री यादव को ना तो अपने पद के कर्तव्यों एवं जिम्मेवारियों का कोई एहसास है और न ही बिहार की जनता से चुनाव के बाद उन्हें कोई सरोकार है। इसीलिए, नए साल में जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार जनहित के बड़े फैसले ले रहे हैं वहीं श्री यादव दिल्ली रवाना हो गए। श्री प्रसाद ने कहा कि श्री यादव कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पदचिन्हों पर चलने में यकीन करते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ने जब से उन्हें सत्ता से विमुख किया है तब से उनका बिहार की जनता से मोहभंग हो गया है। दरअसल तेजस्वी यादव अंशकालिक राजनीतिज्ञ एवं पूर्णकालिक पर्यटक हैं। उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनती जा रही है जो ठीक से नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर सकते हैं तो वह सत्ता कैसे चलाएंगे। जदयू प्रवक्ता ने कहा कि श्री यादव और उनकी पार्टी के नेताओं के द्वारा दिए गए बयानों एवं जारी किए गए पोस्टरों से सत्ता के लिए उनकी बौखलाहट और हताशा लगातार बिहार की जनता के सामने आ रही है। कभी वे मुख्यमंत्री श्री कुमार को प्रधानमंत्री पद का प्रलोभन देते हैं तो कभी जदयू में टूट की बात करते हुए कहते हैं कि “पार्टी को टूट से बचाना है तो बचा लो”। सत्ता की हताशा और बौखलाहट में श्री यादव और राजद के बयानवीर नेता इतने भ्रमित हैं कि अनर्गल बयानबाजी करते रहते हैं। श्री प्रसाद ने कहा कि श्री यादव को न तो अपनी पार्टी की और न ही पार्टी नेताओं की चिंता है। चुनाव के बाद बिहार की जनता से उनका पहले ही मोहभंग हो चुका है, चाहे बिहार कितने ही बड़े प्राकृतिक आपदा से क्यों ना जूझ रहा हो श्री यादव बिहार को बुरे हाल में छोड़ अज्ञातवास में चले जाते हैं। जदयू प्रवक्ता ने कहा, “श्री यादव या राजद को हमारी चिंता करने की बजाय अपनी पार्टी को संभावित टूट से बचाने की चिंता करनी चाहिए। श्री यादव की कार्यशैली से न तो पार्टी के विधायक खुश हैं और न ही पार्टी के कार्यकर्ता। वह सभी अपने आप को श्री यादव के नेतृत्व में असहज महसूस कर रहे हैं और बात रही गठबंधन की तो महागठबंधन में भी उनकी स्वीकार्यता पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

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