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छात्रों के भाग्यनिर्माता हैं शिक्षक, शिक्षण असाधारण पेशा : कुलपति


दरभंगा:- बिहार के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शुमार ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति प्रो. सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने शिक्षकों को छात्रों का भाग्यनिर्माता बताया और कहा कि शिक्षण असाधारण पेशा है। प्रो. सिंह ने रविवार को विश्वविद्यालय के जुबली हॉल में महान शिक्षक और पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस के मौके पर आयोजित शिक्षक दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षण असाधारण पेशा है। शिक्षक छात्रों को संस्कार देते हैं, सृजन का गुण देते हैं। वे छात्रों के भाग्यनिर्माता होते हैं। उन्होंने इस संदर्भ में अब्राहम लिंकन के उस पत्र का जिक्र किया जो उन्होंने अपने पुत्र के शिक्षक को लिखा था। उन्होंने कहा कि दंड से नहीं सम्मान से ही परिवर्तन संभव है। शिक्षक की विचारधारा गतिमान होती है, उसमें एक अनवरत प्रवाह होता है ।
प्रति कुलपति प्रो. डॉली सिन्हा ने कहा कि छात्र को एक अच्छे नागरिक के रूप में तैयार करने में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। छात्र की ऑंखों में अपने शिक्षकों के लिए सम्मान होता है और वही उनकी सबसे बड़ी पूंजी होती है।
हिन्दी विभागाध्यक्ष (सेवानिवृत्त) प्रो. अजित कुमार वर्मा ने कहा कि शिक्षकों को अहंकारी नहीं होना चाहिए । रस और रौशनी से उनका चित्त निर्मित होता है । वे मानवीय संस्कृति को उदाहृत करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक की उपलब्धि छात्र होते हैं। शिक्षक केवल संसाधन पुरुष नहीं होते , अभिभावक भी होते हैं।
कुलसचिव प्रो.मुश्ताक अहमद ने आगत शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज का दिन मूल्य और नैतिकता का दिन है, यह दिन आत्म निरीक्षण और आकलन का दिन है । फिनलैंड शिक्षा में अव्वल है, लेकिन वहां शिक्षक दिवस नहीं मनाया जाता है । वस्तुतः शिक्षा के लिए समर्पित प्रत्येक दिवस शिक्षक दिवस होना चाहिए ।उन्होंने महान कथाकार फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी पंचलैट का संदर्भ देते हुए शिक्षकों की महत्ता रेखांकित की।
समारोह को सेवानिवृत्त प्रो. टुनटुन झा अचल, पूर्व कुलानुशासक प्रो राम विनोद सिंह, प्रो प्रभाकर पाठक समेत अन्य ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय के सभी पदाधिकारी समेत मुख्यालय के अधिकांश शिक्षक उपस्थित थे।

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