अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

स्वामी विवेकानंद की अनन्य शिष्या प्रियशी सुमन ने देश भर में बजाया डंका

धनबाद:- जब सन् 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म महासभा में वेदांत के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद ने जब विश्व भर में डंका बजाया था तो कौन जानता था कि उन्हें अपना आदर्श मानने वाली मिस प्रियशी सुमन उनके नक्शे कदम पर चलते हुए देश भर में अपनी विद्वता का डंका बजाएगी।
जी हां! प्रियशी सुमन वह कन्या हैं जिसने यह साबित कर दिया हैं की पूत के पाव पालने में ही दिखने लगते हैं। जन्म से ही होशियार प्रियशी ने बायजुस प्रायोजित डिस्कवरी स्कूल सुपर लीग सामान्य ज्ञान क्विज प्रतियोगिता में देश भर के प्रतिभागियों को टक्कर देकर दूसरा स्थान जीती हैं।
प्रियशी के झारखंड टीम सदस्य स्थित प्रयाग एवं निर्मय की तिकड़ी ने झारखंड का नाम देश भर में रोशन किया है।
गौरतलब है कि इस सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता के अंतिम राऊंड में झारखंड के साथ बिहार, बंगाल, राजस्थान, महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के प्रतिभागियों के साथ बड़ी ही मुश्किल प्रतियोगिता में बंगाल के बाद झारखंड ने दूसरा स्थान प्राप्त किया हैं।
झारखंड के प्रतिनिधि प्रियशी शुरू से ही संघर्षशील थी एवं कुछ कर गुजरने की ललक ने आज उसे एक ऐसे प्रतियोगिता में जिताया है जिसे जीतने की ख्वाहिश हर छात्र को होती है।
मिस प्रियशी सुमन के जुनून के पीछे उसके गुरु स्वामी विवेकानंद का एक उद्धरण है जिसे प्रियशी हमेशा अपने दिमाग में बैठाए रखती है। “उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाये” यही वो वाक्य है जिसमे प्रियशी सुमन की सफलता का राज है। प्रियशी का साफ कहना है कि ब्रह्मांड की सभी शक्तियां हमारे अंदर हैं और हम किस तरह से इसे उपयोग करते हैं यह हमारी इच्छा शक्ति पर निर्भर करता हैं।
प्रियाशी धनबाद जिला के चिरकुंडा क्षेत्र से आती हैं। प्रियशी की पूरी पढ़ाई उनके गुरु के आराधक स्कूल से हुई हैं और उनके स्कूल का नाम ही हैं ‘स्वामी विवेकानंद स्कूल’ । प्रियाशी की जीत से उनका पूरा स्कूल परिवार भी खुशियां मना रहा है। इस वर्ष स्वामी विवेकानंद स्कूल के लिए यह दूसरा बड़ा मौका हैं ।
इसके पूर्व स्कूल को सीबीएसई +2 तक की मान्यता मिलने के बाद यह दूसरा सबसे सुखद क्षण हैं। स्कूल के सभी सह विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने भी मिस सुमन को बधाईयां दी हैं।
चिरकुंडा की बहुचर्चित मिस प्रियशी सुमन की इस सफलता का एक बहुत बड़ा श्रेय उसके गुरु पिता संजीव साव को जाता हैं।
प्रियशी के विद्यालय के प्राचार्य ने बताया कि इस जीत के इनाम के तौर पर नासा ट्रिप और तीन लाख नगद पुरस्कार मिलना हैं। नासा विहार प्रत्येक छात्र का एक सपना होता है और यह सपना उनकी छात्रा पुत्री ने जीत लिया हैं।
प्रियशी को बधाई देने वालो का ताता लगा हुआ हैं।

%d bloggers like this: