रांची:-  राँची विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (एन एस एस) इकाई द्वारा आज आर यू के कुलपति सभागार में नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी जयंती पराक्रम दिवस के रूप में आयोजित किया गया जिसकी अध्यक्षता राँची विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ कामिनी कुमार ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ नेताजी के चित्र पर पुष्पांजलि कर उन्हें नमन किया गया।
अपने संबोधन में कुलपति डॉ कामिनी कुमार ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के वीरगाथा एवं पराक्रम भारत में ही नही बल्कि विदेशों में भी सुनाई देती है।उन्होंने कहा नेताजी द्वारा दिया गया प्रमुख नारा ” तुम मुझे खून दो – मै तुम्हें आजादी दूंगा” ये केवल नारा नही था बल्कि इस नारे ने पूरे भारत में देशभक्ति का वो ज्वारभाटा पैदा किया जो  देश के स्वतंत्रता का आधार बना। उन्होंने कहा कि नेताजी स्वामी विवेकानंद के शिक्षाओं से अत्यधिक प्रभावित थे और उन्हें अपना आध्यात्मिक गुरु मानते थे। उन्होंने कहा कि पूरा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है एवं इस 75 वर्षों में पहली बार गणतंत्र दिवस समारोह 23 जनवरी से ही मनाकर नेताजी के पराक्रम को वर्तमान पीढ़ी को अवगत करा रही है।उन्होंने उपस्थित एन एस एस के स्वयंसेवकों से नेताजी के जीवनी को स्मरण करते हुए वर्तमान चुनौतियों का सामना करते हुए समाज में रचनात्मक कार्य करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर आर यू के परीक्षा नियंत्रक डॉ आशीष कुमार झा ने कहा कि नेताजी का स्मरण मात्र से अदम्य साहस की अनुभूति होती है।उन्होंने कहा कि नेताजी आज भी देशवासियों के मन में समाए हुए हैं, खासतौर से  युवा उनसे हमेशा प्रभावित रहें हैं।
     एन एस एस के कार्यक्रम समन्वयक डॉ ब्रजेश कुमार ने कहा कि नेताजी के पराक्रम की गाथाएं करोड़ो भारतीय के अंदर उर्जा एवं उत्साह का संचार होता है ।उन्होंने कहा कि नेताजी ने देश के सबसे पहले सशस्त्र बल की स्थापना करके आज़ादी की लड़ाई में अपना बहुमूल्य योगदान दिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ कमल कुमार बोस ने किया और धन्यवाद ज्ञापन अनुभव चक्रवर्ती ने किया।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में एन एस एस के  स्वयंसेवक क्रमशः दिवाकर आनंद, प्रिंस तिवारी, आभास कुमार, फलक फातिमा, नेहा कुमारी, भावना, श्रद्धांजलि, नैंसी, नवीन, उज्जवल, पवन, मोनिका, संदीप, पूनम, श्रुति, सुजीत , काजल, शुभम आदि का उल्लेखनीय योगदान रहा।
     

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