May 8, 2021

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दादा दादी से सुनी कहानियों ने बदली जीवन की राहें : सीपीआई उम्मीदवार शुभम बनर्जी

कोलकाता:- बचपन में दादा दादी से सभी कहानियां सुनते हैं। मैं भूत- प्रेत या दैत्य-दानव के बजाय राजनीतिक संग्राम की कहानियां सुनता था। मेरी सोच भी उसी तरह विकसित हुई है। उपरोक्त बातें दक्षिण 24 परगना की सोनारपुर दक्षिण सीट से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार शुभम बनर्जी ने ‘हिंदुस्थान समाचार’ के पश्चिम बंगाल राज्य ब्यूरो प्रमुख संतोष मधुप से विशेष बातचीत में कही। सीपीआई के छात्र संगठन एआईएसएफ के अध्यक्ष 30 वर्षीय शुभम बनर्जी को भाकपा ने पहली बार सोनारपुर दक्षिण से उम्मीदवार बनाया है ।
मूल रूप से एक राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से ताल्लुक रखने वाले शुभम के दादा नंद दुलाल हावड़ा जिला में सीपीआई के संस्थापकों में गिने जाते हैं जबकि शुभम की दादी मोनिका बनर्जी छात्र फेडरेशन तथा आईपीटीए से जुड़ी थीं। शुभम के पिता भी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े हुए हैं और बाली के आंचलिक सचिव हैं। यही वजह है कि शुभम के राजनीति में आने को लेकर किसी को कभी कोई शंका नहीं रही। शुभम बताते हैं कि इससे पहले वे पार्टी और वामपंथी मोर्चा के दूसरे उम्मीदवारों के लिये चुनाव प्रचार कर चुके हैं। शुभम का जन्म एवं परवरिश हावड़ा के बाली में हुई। 2013 में स्कॉटिश चर्च से रसायन शास्त्र में स्नातक डिग्री हासिल करने वाले शुभम को बालीगंज साइंस कॉलेज से जैव रसायन में एमएससी करने के दौरान मोटी तनख्वाह पर विदेश में नौकरी करने का अवसर मिला था लेकिन शुभम ने जाने से इनकार कर दिया। इतने अच्छे प्रस्ताव को ठुकराने की वजह क्या थी? इस सवाल पर शुभम ने बताया- “पहली बात ये कि उस वक्त मैं पढ़ाई कर रहा था। दूसरा ट्रेनिंग के लिए मेरे जाने की तिथि 7 अगस्त 2013 थी और 12 अगस्त को एआईएसएफ का कोलकाता जिला सम्मेलन था। इस सभा को सफल बनाने के लिए लंबे समय से प्रयत्न कर रहा था। अंतिम क्षणों में उसे छोड़कर जाना सही नहीं लगा। उसी सम्मेलन में मुझे संगठन का जिला सचिव नियुक्त किया था। शुभम ने बताया कि उन्होंने 2013 में ही नेट और गेट की परीक्षाओं में शिरकत की और दोनों में अच्छे नतीजे लाने में सफल रहे। 2015 में बायोइनफॉर्मेटिक्स में एमटेक किया। 2016 में उन्हें एआईएसएफ का अखिल भारतीय अध्यक्ष चुना गया। शुभम बताते हैं कि उनसे पहले बंगाल के किसी और व्यक्ति को यह दायित्व नहीं मिला था। बाद में वे सीपीआई की राष्ट्रीय परिषद के कनिष्ठतम सदस्य बनाये गये। सोनारपुर दक्षिण सीट पर शुभम का मुकाबला तृणमूल उम्मीदवार और अभिनेत्री लवली मोइत्रा एवं बीजेपी की की अंजना बसु के साथ है। इनसे कैसे पार पाएंगे? शुभम का जवाब था, यह तो चुनाव का मैदान है। जो राजनीति जानते हैं, वे सफलताएं अर्जित करके खुद भी स्टार बन सकते हैं। जो चुनावी मैदान में हैं, वह भी सितारे ही हैं। किसी सीरियल की अभिनेत्री ही स्टार हो सकती हैं, ऐसा जरूरी नहीं है। जो आम आदमी के लिए काम करता है, वह भी स्टार है। चुनाव के नतीजे क्या होंगे? इस सवाल पर शुभम का कहना था – “यहां मैं उम्मीद करता हूं कि मुझे जीत मिलेगी? मैं अपनी सफलता को लेकर शत-प्रतिशत आश्वस्त हूं। इस आत्मविश्वास की वजह? यहां ज्यादातर मतदाता शिक्षित व मध्यमवर्गीय परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। 2016 एवं 2019 में चुनाव प्रचार के लिए जब मैं यहां आया था, तब लोगों की प्रतिक्रिया अलग तरह की थी और अब हर दस में से सात आठ व्यक्ति आगे आकर हम से हाथ मिलाते हैं, नमस्कार करते हैं, गले लगा कर कहते हैं चिंता करने की जरूरत नहीं है। आप को ही वोट दूंगा। शुभम कहते हैं कि यहां के लोगों को उनसे बहुत उम्मीदें हैं। उनका कहना है कि इससे पहले इस क्षेत्र में युवा और इतना शिक्षित उम्मीदवार चुनाव लड़ने नहीं आया। वैसे शुभम चाहे जो भी दावे करें, सोनारपुर दक्षिण विधानसभा सीट के जो आंकड़े हैं, वह कुछ और ही कहते हैं। 1977 से 5 बार यहां से माकपा जीतती रही जबकि तीन बार तृणमूल कांग्रेस जीती है। 2011 और 2016 के चुनावों में यहां तृणमूल ने अपनी स्थिति काफी मजबूत कर ली है। उधर पिछले चुनाव में भाजपा का वोट शेयर भी बड़ा है और इस बार वह मजबूत दावेदारी पेश कर रही है। भविष्य की योजना के बारे में शुभम ने बताया कि राज्य छोड़कर नहीं जाऊंगा, यह पहले ही कह चुका हूं। हर व्यक्ति का अपना-अपना सपना होता है। मेरा सपना राजनीति करना और राजनीति के माध्यम से समाज को संगठित करना है। देखते हैं, आगे क्या होता है। उल्लेखनीय है कि सोनारपुर दक्षिण सीट पर चौथे चरण के तहत 10 अप्रैल को मतदान होगा।

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