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जेपीएससी में एसटी-एससी-पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थी सफल हुए, तो मनुवादियों के पेट में दर्द हो रहा हैं-हेमंत सोरेन

जेपीएससी स्वतंत्र इकाई, सरकार किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करेगी



रांची:- झारखंड विधानसभा के शीतकान सत्र के तीसरे दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जेपीएससी के मुद्दे पर सदन में अपना वक्तव्य रखते हुए कहा कि झारखंड लोक सेवा आयोग एक स्वतंत्र इकाई है और राज्य सरकार ने उसके कार्यों में कोई हस्तक्षेप नहीं करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जेपीएससी के कार्यों में कोई भी और कहीं भी या किसी तरह का हस्तक्षेप अब तक नहीं किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार जेपीएससी द्वारा सातवीं से दसवीं तक के सिविल सेवा परीक्षा के लिए पीटी परीक्षा आयोजित की गई जिसमें रिकॉर्ड संख्या में अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया है। उन्होंने बताया कि इस परीक्षा में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के बच्चों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और परीक्षा में सफलता हासिल की है ,यही कारण है कि मनु वादियों के पेट में दर्द हो रहा है । उन्होंने कहा कि परीक्षा को बाधित करने के उद्देश्य से विश्व हिंदू परिषद के नौजवानों को धरना पर बैठाया गया है। बैक डोर से आंदोलनकारियों को फंडिंग की जा रही है, मदद पहुंचाई जा रही है , अनाज और राशन समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि पिछले 15 से 16 वर्षों तक राज्य में भाजपा नेताओं ने शासन किया लेकिन राज्य की क्या स्थिति है यह सभी देख सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछली सरकार में भी जेपीएससी की कार्य प्रणाली पर सवाल उठायी गयी, गड़बड़ी करने वाले कई पदाधिकारी जेल में है और कई परीक्षाओं की जांच चल रही है। पूर्ववर्ती सरकार में पांच वर्ष में परीक्षा तक नहीं ली गयी, देश में पहली बार इतने पैमाने पर अभ्यर्थी परीक्षा में बैठे हैं। आरक्षित कोटि के कई बच्चे सामान्य कोटि में सफल हुए, आयोग ने कुछ परीक्षार्थियों को परीक्षा संपुष्टि के लिए बुलाया गया, लेकिन उसमें भी कई बच्चे नहीं आए।

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