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‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ का नारा अमेठी में फिलहाल बेअसर


अमेठी:- गांधी परिवार की कर्म स्थली के तौर पर विख्यात अमेठी में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा का ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ का नारा बेअसर होता दिखाई पड़ रहा है। पार्टी की पहली सूची में घोषित दो सीटों के प्रत्याशियों में महिलाओं को स्थान नहीं मिला है जबकि जातिगत समीकरणों को देखते हुये शेष दो में भी आधी आबादी को प्रतिनिधित्व मिलना मुश्किल प्रतीत हो रहा है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा की चुनावी वैतरणी पार करने की कोशिश कर रही कांग्रेस की कमान प्रियंका गांधी के हाथ में है जिन्होने आधी आबादी के सहारे सत्ता पाने के कठिन लक्ष्य के साथ ‘मैं लड़की लड़ सकती हूं’ का नारा दिया है।अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार प्रियंका ने 40 फीसदी महिलाओं को पहली सूची में टिकट दिया है हालांकि अमेठी के जगदीश पुर विधान सभा सीट से विजय पासी को मैदान में उतारा है वहीं तिलोई सीट पर प्रदीप सिंघल को टिकट दिया है। पहली सूची में एक भी महिला प्रत्याशी कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को नहीं मिला है। जिले में अभी दो सीटों पर टिकट घोषणा होना बाकी है जिसमें गौरीगंज और अमेठी की विधानसभा सीटें शामिल हैं। इन सीटों पर फिलहाल कांग्रेस के लिये मजबूत महिला प्रत्याशी नजर नहीं आ रहे हैं। गौरीगंज से अभी तक अपनी उम्मीदवारी को लेकर पुरुष प्रत्याशी के मैदान में डटे हुए हैं जिसमें राजू पंडित,अरुण मिश्रा,मोहम्मद नईम,फतेह बहादुर रवि दत्त मिश्रा, सदाशिव यादव डटे हुए हैं वहीं अमेठी से नरेंद्र मिश्रा,धर्मेंद्र शुक्ला,देवमणि तिवारी,अरविंद चतुर्वेदी के नाम अभी तक उम्मीदवारों की लिस्ट में चर्चा में है। ऐसे में महिला प्रत्याशी की घोषणा होना बहुत मुश्किल लग रहा है।
गौरतलब है कि अमेठी जिले के तिलोई विधानसभा से सुनीता सिंह कांग्रेस की पुरानी और कद्दावर नेता हैं उन्होंने भी टिकट के लिए आवेदन किया था फिलहाल पहली सूची जारी होने के बाद उन्हें भी निराशा ही हाथ लगी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि प्रियंका गांधी का यह नारा लड़की हो लड़ सकती हूं अमेठी में कैसे साकार होगा।

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