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छह गोल्ड मेडल विजेता हैंडवॉल खिलाड़ी कर रही हैं मजदूरी
सिर्फ मेडल से पेट नहीं भरता, जीने के लिए चाहिए रोटी


रांची:- झारखंड में लातेहार जिले के गुरीटांड़ गांव की रहने वाली रजनी कुमारी हैंडबॉल खिलाड़ी हैं। अपनी प्रतिभा के बूते वह राज्य स्तर पर वर्ष 2008 से लेकर वर्ष 2015 तक के अपने खेल करियर के दौरान छह गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। लेकिन अन्य कई खिलाड़ियों की तरह की आर्थिक तंगी से जूझ रही रजनी इन दिनों खेल मैदान की जगह शुक्रवार को साप्ताहिक बाजार का दिन छोड़ कर हर दिन सुबह आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक सिर पर ईट ढुलाई करते हुए नजर आती है। मजदूरी से रोजाना 180 रुपये कमाने वाली रजनी का कहना है कि सिर्फ मेडल से पेट नहीं भरता, जीने के लिए रोटी चाहिए। इस मजदूरी के पैसे से ही वह बूढ़ी मां की दवा और खुद के साथ अपनी छोटी बहन की जरूरतें पूरी करती हैं। रजनी बताती है कि जब वह दसवीं में थी और खेलती थी, तो लोग कहते थे कि मन लगाकर खेलेगी, तो जिले और राज्य का नाम रौशन होगा, फिर पैसे की तंगी नहीं होगी, लेकिन यह हकीकत नहीं हो सका।
रजनी ने वर्ष 2008 से 2015 तक अपने करियर के दौरान राजधानी रांची से लेकर पंजाब, असम, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और त्रिपुरा समेत कई राज्यों में अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाया, वहीं राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में छह गोल्ड जीत कर लातेहार जिले का नाम रोशन किया, परंतु घर-परिवार की आर्थिक परिस्थितियों के कारण उसने खेल का मैदान छोड़ दिया और अब वह दिहाड़ी मजदूर बन गयी हैं।
लातेहार के जिला खेल पदाधिकारी शिवेंद्र सिंह का कहना है कि खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार हरसंभव उपाय कर रही है, उन्होंने भरोसा दिलाया कि रजनी को भी यथासंभव मदद की जाएगी और सरकार की ओर से उसे पुरस्कृत भी किया जाएगा।

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