पटना। राज्यभर में सितंबर माह से प्रीपेड मीटर लगने लगेंगे। ये मीटर भारत सरकार का उपक्रम ईईएसएल (एनर्जी एफिसिएंसी सर्विसेज लिमिटेड) अपने खर्च पर लगाएगा। बिजली कंपनी को मीटर खरीद मद में एक रुपये भी खर्च नहीं करने पड़ेंगे। शर्त यह है कि मीटर लगने के बाद बिजली कंपनी राज्य के सभी उपभोक्ताओं के यहां लगे मीटरों का किराया ईईएसएल कंपनी को देगी।

: ऐप से मिलेगी बिजली खर्च की पल-पल की जानकारी

जून माह के अंत में प्रीपेड मीटर में इस्तेमाल होने वाली नई तकनीक विकसित हो जाएगी। बिजली खर्च की पल-पल की जानकारी उपभोक्ता अपने स्मार्ट फोन में मोबाइल ऐप डाउनलोड कर देख सकेंगे। फ्रांस की कंपनी इलेक्ट्रिसिटी डी फ्रांस प्रीपेड उपभोक्ताओं के लिए नयी तकनीक विकसित कर रही है। प्रीपेड मीटर अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित होगा।

: अरवल और शिवहर से शुरुआत :

प्रीपेड मीटर लगाने की शुरुआत जुलाई माह में दक्षिण बिहार के अरवल और उत्तर बिहार के शिवहर में प्रीपेड मीटर लगाकर होगी। दोनों शहरी क्षेत्र में मीटर लगेंगे। मीटर की सफलता की जांच होगी। आने वाली तकनीकी खामियों को दूर कर मॉडल तैयार होगा। उसी तर्ज पर सितंबर माह से राज्य के सभी जिलों में मीटर लगना प्रारंभ हो जाएगा। राज्य भर में 1.45 करोड़ उपभोक्ता हैं।

प्रीपेड मीटर बंद होने से बिजली कंपनी की स्थापना मद में काफी राशि बचेगी। सभी बिजली बिल जमा करने के काउंटर बंद हो जाएंगे। प्रत्येक माह मीटरों के रीडिंग मद में खर्च होने वाली राशि की बचत होगी। उपभोक्ता टॉपअप राशि भरवाएंगे और बिजली का उपभोग करेंगे। पैसा समाप्त होने के बाद स्वत: बिजली कट जाएगी। सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं के यहां प्रीपेड मीटर लगेगा।
ज्ञात हो कि विद्युत कंपनी राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों से बिजली बिल की वसूली नहीं कर पा रही है। राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के सभी घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के साथ-साथ औद्योगिक उपभोक्ताओं के यहां भी प्री-पेड मीटर लगेगा।

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