रांची: मस्जिद जाफरिया रांची में हजरत अली की शहादत दिवस के मौके पर पांच दिवसीय मजलिस ए गम के तीसरी मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना रिजवान मारुफी ने कहा के हजरत अली ने अपनी जिंदगी में लोगों को शिक्षा पर बहुत जोर दिया। और फरमाया के शिक्षा अमीरी है और जहालत गरीबी। शिक्षित इंसान जब कोई फैसला करता है तो सूझबूझ के साथ करता है। शिक्षा के बगैर ईमान भी अधूरा है। अशिक्षित की इबादत 100 रकात नमाज और शिक्षित की इबादत 2 रकात नमाज बराबर है। इसलिए हजरत अली ने फरमाया के कुरआन ए पाक सिर्फ रट कर न पढ़ो, बल्कि समझ बूझ कर पढ़ो। जब समझ बूझ कर पढ़ोगे तो तुम्हारे शिक्षा में बढ़ोतरी होगी। शिक्षा वो खजाना है जिसे तुम जितना खर्च करोगे वह उतना बढ़ेगा। मौलाना रिजवान ने कहा कि हजरत अली ने अपनी पूरी जिंदगी रसूले इसलाम के साथ इस्लाम के प्रचार-प्रसार के लिए वकफ़ कर रखी थी। हजरत अली को 19 रमजान 40 हिजरी को मस्जिद कुफा में हालाते सजदा में जख्मी कर दिया गया। जिससे आपकी शहादत हो गई। नोहा खानी कासिम अली, हसनैन अली, अतहर इमाम ने की। मौके पर मस्जिद जाफरिया के इमाम व खतीब हाजी मौलाना सैयद तहजिबुल हसन रिज़वी, सैयद मेहंदी इमाम, जफरुल हसन, शकील हैदर, डॉक्टर शमीम हैदर, हसनैन जैदी, हाजी इकबाल हुसैन, शमीम उल हसन, यादगार हुसैन, समर अली, आमोद अब्बास, एस एच फातमी, समेत कई लोग थे।

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