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जयंती पर श्रद्धापूर्वक याद किए गए भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर


बेगूसराय:- भोजपुरी अस्मिता के प्रतीक और भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर आज इतिहास के पन्नों में सिमटे नजर आ रहे हैं। किसी समाज को आईना दिखाने वाली रचनाएं लिखने वाले उनकी प्रसंगिकता आज भी संघर्ष के दौर में खड़ी है। यह बातें अराजपत्रित कर्मचारी संघ के संयुक्त सचिव मथुरा ठाकुर ने नगर निगम क्षेत्र के कपस्या स्थित मध्य विद्यालय में आयोजित भिखारी ठाकुर की 135 वी जयंती के अवसर पर कही। समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय नाई महासभा के जिलाध्यक्ष रविंद्र कुमार पप्पू ने कहा कि बाबा भिखारी ठाकुर केवल लोक कलाकार ही नहीं थे, बल्कि जीवन भर सामाजिक कुरीतियों और बुराइयों के खिलाफ कई स्तरों पर जूझते रहे थे। उनके अभिनय और निर्देशन में भोजपुरी नाटक बेटी बेचवा, गबरघिचोर, बेटी वियोग का आज भी मंचन होता है तथा दर्शक मंत्रमुग्ध होकर देखते हैं। इन नाटकों और फिल्मों के माध्यम से भिखारी ठाकुर ने सामाजिक सुधार के दिशाओं में अद्भुत पहल की थी।

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