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‘आजादी और आत्मनिर्भर भारत’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित


देहरादून:- केन्द्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय देहरादून स्थित प्रादेशिक लोक सम्पर्क ब्यूरो (आरओबी) द्वारा ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के अंतर्गत मनाये जा रहे आईकॉनिक वीक के अंतिम दिन रविवार को ‘आजादी और आत्मनिर्भर भारत’ विषयक एक आभासी संगोष्ठी (वेबिनार) आयोजित की गई।
विशेषज्ञ वक्ता के रूप में चमनलाल स्नातकोत्तर महाविद्यालय, लंढौरा (हरिद्वार) के प्राचार्य प्रोफेसर डाॅक्टर सुशील कुमार उपाध्याय ने कहा कि हम जब बीते 75 वर्षों को देखते हैं तो लगता है, मानों देश मदारी और सपेरों का था। जबकि आज हम जितनी तकनीकी विषयों को देख पाते हैं तो इस अद्भुत यात्रा की रोचकता देखते ही बनती है। उन्होंने कहा कि भौगोलिक रूप से भी 1947 का नक्शा और आज का नक्शा देखा जाए तो ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जिसमें लगभग 400 गुना वृद्धि देखने को मिलती हैं।
डाॅ. उपाध्याय ने कहा कि आज हम कोरोना जैसे घातक बीमारियों के वैक्सीनेशन को लीड करते हैं। इससे पहले भी, भारत ने सभी घातक बीमारियों के टीकाकरण के लिए सबसे सस्ती और सफल दवाइयां बनाई है। यह अपने आप में सबसे बड़ी और सफल उपलब्धि रही है। उन्होंने कहा कि यह हमारा पड़ाव नहीं है, हमें अभी आधुनिकीकरण और आज के विचारों के साथ तालमेल बिठाकर आत्मनिर्भरता, विकास शीलता, का प्रतिनिधित्व करना है।
देहरादून निवासी पूर्व सहायक प्रोफेसर, कवियत्री मीनू गोयल चौधरी ने देश के राष्ट्र-गीत की कुछ पंक्तियों से अपना वक्तव्य आरंभ करते हुए कहा कि वीर स्वतंत्रता सेनानियों को आजादी के दीवाने यूं ही नहीं कहा जाता, उन्हें अपनी मिट्टी से प्यार था। उन्होंने कहा कि देश की सफलता सबसे छोटी इकाई पर निर्भर करती है। देश की सबसे छोटी इकाई गांव और समाज की सबसे छोटी इकाई परिवार होते हैं और किसी भी योजना को धरातल पर लाने और उन्हें बनाए रखने की जिम्मेदारी इन्हीं सबसे छोटी इकाइयों पर निर्भर करती है। उन्होंने डिजिटइजेशन और एमएसएमई जैसी योजनाओं को उपलब्धि के रूप में बताया।
इससे पूर्व, अपर महानिदेशक, आरओबी-पीआईबी, लखनऊ और देहरादून आरपी सरोज ने कार्यक्रम की रूपरेखा बताते हुये कहा कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा आयोजित इस विशेष आईकॉनिक वीक का उद्देश्य भारत में आजादी के मतवालों को लेकर छिपे हुये क्रांतिवीरों को प्रकाश में लाना है। उन्होंने बताया कि इसमें स्वतंत्रता सेनानियों को आमंत्रित कर उन्हें सम्मान देने और जिनके नाम अंकित हम नहीं कर सके हैं, उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए जाएं, उन्हें याद किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य उन सपूतों को नमन करने के साथ ही आजादी के समय भारत कैसा था और आज हम कहां पहुंचे हैं, इस विकास यात्रा को दिखाया जाना भी रहा है। वेबीनार के अंत में आरओबी, देहरादून की सहायक निदेशक डॉ. संतोष आशीष द्वारा सभी वक्ताओं और श्रोताओं को धन्यवाद दिया।

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