February 28, 2021

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सऊदी अरब का नया ऐताहिसक कदम- अब सेना में शामिल होंगी महिलाएं , 4 पदों पर भर्ती को मंजूरी

दुबई:- दुनिया में अपने कट्टर इस्‍लामिक कानूनों के लिए जाने जाते सऊदी अरब में अब महिलाओं के लिए आजादी के द्वार धीरे -धीरे खुलते जा रहे हैं। वर्ष 2017 में जब प्रिंस सलमान सत्ता में आए तो अपना विजन 2030 के बारे में दुनिया को अवगत कराया। इसके तहत उन्होंने महिलाओं को कई बड़े अधिकार देने शुरू कर दिए । रूढ़िवादी देश में उदारता और आधुनिकता लाने की प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की कोशिशों के तहत सऊदी अरब ने घोषणा की है कि अब महिलाएं भी सेना में शामिल हो सकती हैं। सऊदी अरब ने सेना के तीनों ही अंगों आर्मी, एयरफोर्स, नेवी, मेडिकल सेवा और रॉयल स्‍ट्रेटजिक मिसाइल फोर्स में महिलाओं के शामिल होने की अनुमति दे दी है।
चार पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की मंजूरी
सऊदी अरब के महिलाओं के अनुमति देने को बड़ा कदम माना जा रहा है। डिफेंस मिनिस्ट्री ने करीब दो साल चले विचार विमर्श के बाद इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी दे दी है। शुरुआत में महिलाओं को चार पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की मंजूरी दी है। यह भी साफ कर दिया गया है कि फिलहाल, सिर्फ शहरों में इनकी तैनाती होगी और अभी इन्हें जंग के मैदान से दूर रखा जाएगा।‘अरब न्यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार डिफेंस मिनिस्ट्री ने एक यूनिफाइड एडमिशन पोर्टल रविवार को शुरू कर दिया है। इसमें पहली बार पुरुषों के साथ ही महिलाओं को भी आवेदन की मंजूरी दी गई है। फिलहाल, सैनिक से सार्जेंट के कुल 4 पदों के लिए महिलाएं आवेदन कर सकेंगी। वे रॉयल सऊदी अरेबियन आर्मी, रॉयल सऊदी एयर फोर्स, रॉयल सऊदी नेवी, रॉयल सऊदी स्ट्रैटेजिक मिसाइल फोर्स और रॉयल आर्म्ड फोर्स मेडिकल सर्विस के लिए आवेदन कर सकेंगी।
भर्ती के लिए पूरी करनी होंगी शर्तें
सेना में महिलाओं की भर्ती के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं। आपराधिक रिकॉर्ड या मेडिकली अनफिट महिलाएं आवेदन नहीं कर सकेंगी। इनकी उम्र 21 से 41 साल के बीच होनी चाहिए। लंबाई 155 सेंटीमीटर जरूरी होगी। पहले से किसी सरकारी पद पर तैनात महिलाएं आवेदन नहीं कर सकेंगी। कम से कम हाईस्कूल की डिग्री होनी जरूरी है। विदेशी नागरिकता वाले व्यक्ति से शादी करने वाली महिलाएं भर्ती नहीं की जाएंगी।
इससे पहले महिलाओं को मिल चुके हैं ये अधिकार
सऊदी अरब में महिलाओं के अधिकारों को लेकर उठाए गए कदमों में पहला कदम साल 2018 में उठाया गया था। वर्ष 2017 में प्रिंस सलमान ने सत्ता में आते ही विजन 2030 के तहत महिलाओं को वाहन चलाने की अनुमति दी। रूढ़िवादी देश में उदारता और आधुनिकता लाने की प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की कोशिशों के तहत यह प्रतिबंध समाप्त किया गया। सऊदी अरब में 2018 से पहले तक महिलाओं के वाहन चलाने पर प्रतिबंध था।
सऊदी अरब ने महिलाओं को अधिकार देने की कड़ी में दूसरे कदम के तौर पर महिलाओं को हवाई जहाज उड़ाने की अनुमति दी। देश में सबसे सस्ती सेवाएं देने के लिए विख्यात सऊदी अरब की एयरलाइन कंपनी फ्लाइनस ने साल 2018 में सह-पायलटों और फ्लाइट अटेंडेंट्स के रूप में काम करने के लिए महिलाओं की भर्ती की योजना की घोषणा की थी। इस योजना बाद 24 घंटे के भीतर ही एक हजार महिलाओं ने सह-पायलट पद के लिए कंपनी के पास आवेदन किया था।
तीसरे कदम के तौर पर, सऊदी अरब ने इस वर्ष महिलाओं के अधिकारों में बढ़ोतरी करते हुए उन्हें अकेले विदेश यात्रा की अनुमति दी थी। सऊदी के इस फैसले के बाद 21 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को पासपोर्ट हासिल करने और किसी पुरुष संरक्षक की अनुमति के बिना ही विदेश यात्रा की इजाजत दी गई। इस ऐतिहासिक सुधार के बाद वह पुरानी संरक्षण प्रणाली समाप्त हो गई जिसके तहत कानून महिलाओं को स्थायी रूप से नाबालिग समझता था और उनके ‘संरक्षकों’ यानी पति, पिता और अन्य पुरुष संबंधियों को उन पर मनमाना अधिकार प्रदान करता था।
प्रिंस सलमान की तारीफ
अरब न्यूज से बातचीत में कई महिलाओं ने प्रिंस सलमान और सेना के इस फैसले की तारीफ की। ऑपरेटिंग सिस्टम स्पेशलिस्ट हलाह अल यानबावी ने कहा- 30 साल से इस मुद्दे पर विचार और बहस चल रही थी। लेकिन, आज प्रिंस सलमान ने तस्वीर बदल दी है। सरकारी नौकरी हो या सेना, अब सभी जगह महिलाएं नौकरी कर सकती हैं। मेरे हिसाब से यह बहुत अहम फैसला है। हमारे समाज की सोच बदलने के लिए ऐसे ही कुछ और फैसले जरूरी हैं।

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