राँची:- साहब श्री हरीन्द्रानंद जी के निजी सचिव श्री अर्चित आनन्द द्वारा दिवगंत शिवशिष्यों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए चन्द पंक्तियाँ श्रद्धा सुमन के रूप में अर्पित किया है ।

मेरे प्रिय और महादेव के अनन्य शिष्य गुरु भाई रूपेश कुमार उर्फ पप्पू झा जी, लव सिंह जी और साधो मंडल जी अब हमारे बीच नहीं रहे। मृत्यु जगत का सत्य है और हमें महादेव की बनाई इस सृष्टि में अपने प्रिय का विछोह सहना ही पड़ता है। लेकिन सालों के साथ, शिव शिष्यता के एकाकार भाव को भूलना इतना सहज भी नहीं है।
गहन शोक के क्षण आमतौर पर उससे संतप्त हृदयों के निर्मल व निष्छल उदगारों के लिए होते हैं। मन है कि उनका न रहना अभी भी स्वीकार नहीं कर पा रहा और उसे लगता है कि वे अब भी पंचतत्वों में व्याप्त हैं। जब भी कोई शोक सीमाएं लांघता है,तो ऐसे व्यामोह साथ लाता ही है। लेकिन शिव की शिष्यता स्वर्गीय गुरु भाइयों के संकल्प और महादेव की दया से इस शोक से बाहर निकलेगा यही कामना है। उनके पूरे परिवार को महादेव इस अप्रिय स्थिति से बाहर निकलने में मदद करेंगे यह मेरा विश्वास है।

याद उस की इतनी ख़ूब नहीं ‘मीर’ बाज़ आ
नादान फिर वो जी से भुलाया न जाएगा।

अर्चित आनंद(निजी सचिव)साहब श्री हरीन्द्रानंद

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