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संसद में हुआ हंगामा महिला एवं दलित विरोधी, यह विपक्ष की सोची-समझी चालः मंगल पांडेय

पटनाः- बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने किसानों, महंगाई, आंध्रप्रदेश को विशेष दर्जा देने, पत्रकारों की कथित जासूसी, नए मंत्री की नागरिकता और अन्य मुद्दों पर संसद में हुए हंगामे को लेकर विपक्ष को महिला एवं दलित विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के आचरण के कारण मानसून सत्र के पहले दिन ही संसद के दोनों सदनों को स्थगित करना पड़ा। भाजपा के वरिष्ठ नेता मंगल पांडेय ने सोमवार को कहा कि यह विपक्ष की सोची-समझी चाल है और आज का दिन संसदीय इतिहास में काला दिन के रूप में लिखा जाएगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने हंगामा कर न सिर्फ महिलाओं एवं दलितों के सम्मान के साथ खिलवाड़ किया है बल्कि आजादी के बाद से चली आ रही परंपरा में व्यवधान पैदा कर संसद की गरिमा को भी ठेस पहुंचाया है। पांडेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विपक्ष द्वारा दोनों सदनों में नहीं बोलने देना एक नयी परंपरा को जन्म दे रहा है लेकिन देश की जनता सब देख रही है। उन्होंने कहा कि समय आने पर जनता विपक्षी नेताओं को ऐसा सबक सिखाएगी कि उनका दुबारा संसद के किसी भी सदन का दर्शन दुर्लभ हो जाएगा। भाजपा नेता ने कहा कि प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समय से ही दोनों सदनों में प्रधानमंत्री द्वारा नए मंत्रियों के परिचय का सिलसिला चला आ रहा है, लेकिन पूरा विपक्ष दलित, आदिवासी और महिला मंत्रियों के परिचय से इतना व्यथित था कि प्रधानमंत्री के मुंह से नए मंत्रियों का नाम सुनने को तैयार नहीं था। पांडेय ने कहा कि विपक्ष का काम सिफर् हंगामा खड़ा कर सदन को बाधित करना है। विपक्ष को न तो संसदीय परंपरा से कोई मतलब है और न ही विकास से कोई वास्ता है। यही नहीं, आधी आबादी के साथ-साथ आदिवासी और दलितों का विकास विपक्ष को रास नहीं आ रहा है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान पूरा विपक्ष संसदीय मर्यादा को ताक पर रख सदन के दोनों सदनों में हंगामा पर उतारू हो गया। इस कारण प्रधानमंत्री नए मंत्रियों का परिचय नहीं करा सके।

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