अनावरण न्यूज़

एक नयी सुबह का

अंधकार में डूबीं पटना की सड़कें

पटना:- बिहार सरकार के नगर विकास विभाग के अधीन सबसे पुराने कहे जाने वाले पटना नगर निगम की घोर लापरवाही से शहर के कई इलाकों की सड़कें अंधकार में डूबी रहती है। राजधानी पटना में नगर निगम की ओर से सभी 75 वार्डों में एक लाख 25 हजार से अधिक स्ट्रीट लाइट लगाई गई है। इसके बावजूद शहर के कई इलाकों की सड़कों पर अंधेरा पसरा रहता है। हालांकि राजधानी का हर कोना और रोशनी से जगमग हो सके इसके लिए नगर विकास विभाग की ओर से समय-समय पर पटना नगर निगम को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाते रहे हैं लेकिन इस पर कड़ाई से अमल नहीं किया जाता। नगर निगम की लापरवाही के कारण शहर की लगभग 10 हजार से अधिक स्ट्रीट लाइट बंद पड़ी है। इस पर निगम प्रशासन हमेशा की तरह अपनी जिम्मेदारियों से बचते हुए दलील देने में लगा हुआ है। अधिकारियों का दावा है कि प्रतिदिन 300 से अधिक लाइट की मरम्मत का कार्य होता है। शहर में स्ट्रीट लाइट लगाने का कार्य नगर निगम का मार्ग प्रशासन विभाग देखता है। इसके कर्मचारी लाइटों के रखरखाव और गड़बड़ी को ठीक करने का काम करते हैं लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण से अब यह ईएसआर कंपनी के माध्यम से निगम प्रशासन कर रहा है। कंपनी के सूत्रों के अनुसार निगम प्रशासन ने अभी तक करोड़ों रुपए कंपनी को भुगतान नहीं किया है जिससे कंपनी के कर्मचारी लाइट को मरम्मत करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। बंद पड़ी स्ट्रीट लाइट के संबंध में पूछे जाने पर निगम प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि कार्य अभी चल रहा है और जो भी बंद पड़ी लाइट है उसकी मरम्मत हो रही है। शहर को जगमग करने के लिए एक लाख 25 हजार स्ट्रीट लाइट लगाई गई है जिसमें से बंद पड़े लाइट को शुरू करने का कार्य कंपनी के माध्यम से कराया जा रहा है। पटना शहर के विशिष्ट इलाकों की सड़कें हो या फिर कई स्लम एरिया की हर जगह स्ट्रीट लाइट निगम प्रशासन की लापरवाही के कारण बंद पड़े। निगम प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद लापरवाही से बंद पढ़ा हुआ। अभी तक दुरुस्त नहीं किया गया है जिसके कारण कई इलाकों में दुर्घटनाएं होती रहती हैं। शहर में 10 हजार से अधिक स्ट्रीट लाइट खराब पड़ी हुई है। कर्मचारियों की लापरवाही और उदासीनता के कारण विशिष्ट इलाकों को छोड़कर अन्य इलाकों में 10 से 12 प्रतिशत स्ट्रीट लाइट नहीं जल रही है। कोरोना के कारण जब लॉकडाउन लागू किया गया था उस समय सड़कों पर स्ट्रीट लाइट दिनभर जलती रहती थी। संक्रमण के भय से लोग स्ट्रीट लाइट के स्विच को बंद करने से कतराते थे। सरकारी कर्मचारी की बात तो दूर स्थानीय लोग भी सड़कों पर लगे स्ट्रीट लाइट को बंद करने से कतराते थे।

%d bloggers like this: