May 13, 2021

अनावरण न्यूज़

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झारखंड में अभी पाबंदियां नहीं होगी कम

पुत्र के संक्रमित रहने पर भी सीएम सभी को बेड और ऑक्सीजन की व्यवस्था में जुटे

रांची:- झारखंड में कोरोना संक्रमितों मरीजों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि में थोड़ी कमी जरूर आयी है और स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हुई, परंतु कोविड-19 पॉजिटिव मरीजों की संख्या में वृद्धि से चिंता बढ़ गयी है। जिसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पूरा सरकारी महकमा स्थिति को नियंत्रित करने में जुटा है। अपने पुत्र के कोरोना संक्रमित होने के बाद हेमंत सोरेन लगातार कोविड-19 पॉजिटिव मरीजों के लिए बेड, ऑक्सीजन, इंजेक्शन, दवाईयां और अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैय्या कराने में जुटे है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए 22 से 29 अप्रैल तक के लिए राज्य में स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह के नाम पर लॉकडाउन के माध्यम से कई पाबंदियां लागू की गयी और अब भी स्थिति नियंत्रित नहीं होता देख, यह स्पष्ट संकेत मिलने लगा है कि यह पाबंदियां 29 अप्रैल के बाद भी जारी रहेगी और इसमें कुछ संशोधन के साथ राज्य सरकार जल्द ही फैसला ले सकती है।
राज्य में मार्च के पहले पखवाड़े में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ज्यादा खतरनाक नहीं हुई थी, लेकिन अप्रैल के पहले सप्ताह से स्थिति बिगड़ने लगी, परंतु इस बीच 17 अप्रैल को मधुपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर मुख्यमंत्री और कई मंत्रियों के साथ पूरा सरकारी महकमा चुनाव प्रचार में व्यस्त रहा। इस दौरान कोरोना संक्रमण का खतरा राज्य के प्रमुख शहरों से निकल कर ग्रामीण इलाकों तक जा पहुंचा, जिसके कारण पिछले 15 दिनों से प्रतिदिन 5000 से अधिक संक्रमित मिल रहे है। वहीं पिछली बार कोरोना संक्रमितों की मौत का आंकड़ा एक अंकों में रहता था, वह आंकड़ा इस बार दहाई के साथ ही सैकड़ा पार कर जा रहा है। लगातार हो रही मौत से सभी विचलित हो गये हैं, प्रतिदिन श्मशान घाट और कब्रिस्तान में पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार करने वाले भी अंचभित है। श्मशान घाट में लकड़ियां कम पड़ जा रही है, कब्रिस्तान में भी जगह कम पड़ गयी है।
झारखंड के सरकारी अस्पताल ही इस कोरोना संकट के वक्त लोगां के लिए मददगार साबित हो रहे है, लेकिन इन सरकारी अस्पतालों में आधारभूत संरचना की स्थिति है कि राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में एक सीटी स्कैन मशीन भी उपलब्ध नहीं है, इसके माध्यम से ही कोरोना संक्रमित व्यक्ति के फेफड़े पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया जाता है। इसे लेकर झारखंड उच्च न्यायालय की ओर से भी स्वास्थ्य विभाग को कई बार फटकार लगायी, लेकिन इसके बावजूद रिम्स में अब भी कई आधारभूत संरचनाओं की कमी बनी हुई है। हालांकि अब मुख्यमंत्री के पहल और निरीक्षण के बाद रिम्स में करीब 400 बेड का अतिरिक्त कोविड वार्ड भी बन रहा है, जिसमें 50 बेड ऑक्सीजन सपोर्टेड है, वहीं रिम्स परिसर में ही लिक्विड ऑक्सीजन संयंत्र भी 20 दिनों के अंदर लग जाने की बात कही गयी है।
दूसरी तरफ कई सुदूरवर्ती जिलों में कोविड-19 का समुचित उपचार नहीं होने के कारण रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो और हजारीबाग जैसे बड़े शहरों में अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार की ओर से रांची और जमशेदपुर में कोविड सर्किट की भी स्थापना की गयी है, जिससे मरीजों को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन अब भी स्थिति में निरंतर सुधार की जरूरत है।

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