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कोल्हान के तीन संस्कृत विद्यालयों में अल्पसंख्यक विद्यार्थियों का नामांकन लेने का आग्रह


रांची:- कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर बताया कि विगत दिनों कोल्हान प्रमंडल के एक सरकारी एवं दो असम्बद्ध संस्कृत विद्यालयों से सम्बंधित चौंका देने वाली चिंताजनक खबरें देखने को मिली हैं की झारखण्ड एकेडमिक कॉउन्सिल के एक पदाधिकारी के कथित मौखिक आदेश के आलोक में विद्यालय प्रवन्धन ने अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों का मध्यमा परीक्षा के लिए निबंधन-नामांकन पर तत्कालीन रोक लगा दिया था। जिसके कारण अल्पसंखयक छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। समाचार पत्रों में उक्त तीनों स्कूल के प्रिंसिपल का बयान छपा है कि उन्होंने झारखण्ड एकेडमिक कॉउन्सिल के 10 वीं कक्षा सह-कोऑर्डिनेटर कौशल मिश्रा के मौखिक आदेश के आलोक में मुस्लिम छात्रों का निबंधन रोक दिया था। कौशल मिश्रा ने अपना पक्ष रखते हुए इस अमर्यादित, गैरकानूनी, असंवैधानिक और साम्प्रदायिक कदम को यह कहते हुए सही ठहराया है की चूंकि मुस्लिम बच्चे वेद नहीं पढ़ते इसलिए संस्कृत स्कूल में उनका नामांकन नहीं किया जा सकता है। यहां तक की वह पूर्व में हुए नामांकनों पर भी प्रश्न उठाते हैं। झारखण्ड में ऐसा पहली बार हुआ है जब की धर्म और भाषा के आधार पर संस्कृत विद्यालयों में मुस्लिम छात्रों के नामांकन निषेध कर दिया गया जो की बेहद आपत्तिजनक है। यह तो संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन तो है ही यह कृत्य संविधान प्रदत्त ’शिक्षा एक मौलिक अधिकार’ के विरुद्ध है। अब मामला प्रकाश में आने पर आननफानन में शिक्षा विभाग ने उक्त तीनों स्कूल के प्रिंसिपल के विरुद्ध निलंबन – कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। मगर ऐसा प्रतीत होता है की झारखण्ड एकेडमिक कॉउन्सिल के उक्त पदाधिकारी के विरुद्ध कोई भी कार्रवाई नहीं की गयी है। यह झारखण्ड एकेडमिक कॉउन्सिल और उसके पदाधिकारियों के द्वारा शिक्षा के साम्प्रदायिकरण का घृणित प्रयास है जिसे हलके से नहीं लिया जा सकता है। जानकारी के अनुसार 2019 में भी झारखण्ड एकेडमिक कॉउन्सिल ने संस्कृत स्कूलों को ऐसा ही मौखिक निर्देश जारी किया था। इस पूरे मामले की जांच एक उच्चस्तरीय कमिटी के द्वारा हो तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो ताकि भबिष्य में कोई भी शिक्षा का साम्प्रदायिकरण करने की कुचेष्टा न कर सके।

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