नयी दिल्ली:- देश भर में बुधवार को 73वां गणतंत्र दिवस समारोह पारंपरिक हर्षाेल्लास एवं पूरे उत्साह के साथ मनाया गया।

यहां राजपथ पर मुख्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां सुरक्षा, अनुशासन, विभिन्न संस्कृतियों की झलक तथा अदम्य सैन्य शौर्य का अनूठा नजारा देखने को मिला।

परेड की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद परंपरा के अनुसार राष्ट्रगान के बाद राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया और 21 तोपों की सलामी दी गयी। परेड की शुरुआत राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के सलामी लेने के साथ हुई। परेड की कमान दूसरी पीढ़ी के सैन्य अधिकारी, परेड कमांडर, लेफ्टिनेंट जनरल विजय कुमार मिश्रा ने संभाली। वहीं दिल्ली क्षेत्र के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल आलोक काकर परेड के सेकेंड-इन-कमांड थे।

सर्वोच्च वीरता पुरस्कारों के गौरवान्वित विजेताओं ने इन दोनों सैन्य अधिकारियों का अनुसरण किया। इनमें परमवीर चक्र और अशोक चक्र के विजेता शामिल हैं। परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर (मानद कप्तान) योगेंद्र सिंह यादव, 18 ग्रेनेडियर्स (सेवानिवृत्त) और सूबेदार (मानद लेफ्टिनेंट) संजय कुमार, 13 जेएके राइफल्स और अशोक चक्र विजेता कर्नल डी. श्रीराम कुमार जीप पर डिप्टी परेड कमांडर का अनुसरण कर रहे थे।

गणतंत्र दिवस परेड समारोह की शुरुआत प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई। श्री मोदी ने यहां देश की खातिर अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और तीनों सेनाओं के प्रमुख मौजूद थे। यह पहला मौका है, जब प्रधानमंत्री ने गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रीय युद्ध स्मारक स्थित अमर जवान ज्योति पर पुष्पांजलि अर्पित की। पहले प्रधानमंत्री इंडिया गेट पर स्थित अमर जवान ज्योति पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते थे। यह परंपरा 1972 से चली आ रही थी, लेकिन अब इस ज्योति का राष्ट्रीय युद्ध स्मारक स्थित अमर जवान ज्योति में विलय कर दिया गया है।

इस बार गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित होने वाले मुख्य परेड के दौरान कई बदलाव देखने को मिले। पहली बार गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित होने वाला मुख्य कार्यक्रम आधे घंटे बाद पूर्वाह्न 10.30 बजे शुरू हुआ। अभी तक यह कार्यक्रम पूर्वाह्न 10 बजे शुरू होता था। इसके साथ ही वैश्विक महामारी कोरोना वायरस की वजह से लगातार दूसरे साल विशिष्ट अतिथि के तौर पर कोई विदेशी मेहमान इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुआ। राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) द्वारा ‘शहीदों को शत शत नमन’ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। भारतीय वायु सेना के 75 विमानों/हेलिकॉप्टरों द्वारा भव्य फ्लाईपास्ट, राष्ट्रव्यापी वंदे भारतम नृत्य प्रतियोगिता के माध्यम से चुने गए 480 नर्तकियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति, ‘कला कुंभ’ कार्यक्रम के दौरान तैयार किए गए 10 स्क्रॉल (प्रत्येक की लंबाई 75 मीटर) का प्रदर्शन और दर्शकों की बेहतर सुविधा के लिए 10 बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाने जैसे बदलाव देखने को मिले।

कोरोना प्रोटोकॉल के मद्देनजर इस बार परेड में सिर्फ छह हजार लोगों को आने की अनुमति थी। पिछले साल यह संख्या 25 हजार थी। इस साल राजपथ पर परेड देखने के लिए केवल उन्हीं लोगों को इजाजत दी गई थी, जिन्होंने कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज ले रखी थी। कार्यक्रम में 15 साल से कम उम्र के बच्चों को अनुमति नहीं दी गई थी। सामाजिक दूरी के सभी नियमों का पालन किया गया और सभी के लिए मास्क पहनना अनिवार्य था।

इस बार राजपथ पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम में समाज के उन तबकों को अवसर देने के लिए विशेष इंतजाम किए गए, जिन्हें आमतौर पर मौका नहीं मिलता। मसलन ऑटो-रिक्शा चालकों के कुछ वर्गों, निर्माण श्रमिकों, सफाई कर्मचारियों और फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को गणतंत्र दिवस परेड में विशेष दर्शक के तौर पर आमंत्रित किया गया था। श्री मोदी 73वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पर आयोजित मुख्य समारोह के समापन के बाद दर्शकों के बीच पहुंचे और उनका अभिवादन स्वीकार किया। उन्होंने राजपथ पर 73वें गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित मुख्य समारोह के समापन के बाद राष्ट्रपति को विदाई दी। इसके बाद उन्होंने थोड़ी देर तक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ गुफ्तगू की और फिर वह हर साल की तरह दर्शकों का अभिवादन स्वीकार करने के लिए उनके पास पहुंच गये। उन्होंने हाथ हिलाकर राजपथ के दोनों ओर बैठे दर्शकों का अभिवादन स्वीकार किया।

गणतंत्र दिवस के मौके पर श्री मोदी के पहनावे ने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। श्री मोदी ने आज मणिपुरी अंगवस्त्र तथा उत्तराखंड की टोपी धारण कर रखी थी, जिसमें ब्रह्म कमल अंकित था। गौरतलब है कि श्री मोदी जब भी उत्तराखंड के केदारनाथ में बाबा भोले भंडारी का दर्शन करने जाते हैं, तो उन्हें ब्रह्मकमल अवश्य अर्पित करते हैं।

समारोह में पहुंचे दर्शक भी श्री मोदी को अपनी बीच पाकर काफी खुश नजर आए। दर्शकों ने भी हाथ हिलाकर श्री मोदी का स्वागत किया। इस दौरान लोगों ने मोदी-मोदी के नारे भी लगाए।

राजपथ पर आयोजित मुख्य समारोह में सांस्कृतिक तथा लोक कलाओं का अनूठा संगम नजर आया। इस साल गणतंत्र दिवस परेड के दौरान 12 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों तथा नौ मंत्रालयों/विभागों की झांकियां निकाली गयीं।

उत्तर प्रदेश की झांकी में इस बार काशी विश्वनाथ मंदिर मुख्य आकर्षण रहा। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जिसका हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकार्पण किया है, उसको प्रमुखता से दर्शाया गया।

उत्तराखंड की झांकी में सिखों के प्रमुख तीर्थ हेमकुंड साहिब, टिहरी डैम, डोबरा चांठी पुल और चार धाम में से एक बदरीनाथ धाम के साथ ही सरकार की उत्तराखंड के चार धाम को लेकर चल रही महत्वपूर्ण योजना ‘ऑल वेदर रोड’ का प्रदर्शन किया गया।

वहीं पंजाब की झांकी में राज्य से जुड़े स्वतंत्रता सैनिकों और उनके संघर्ष की कहानी को दर्शाया गया। इसमें भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू की प्रतिमा के साथ लाला लाजपत राय पर हुए लाठी चार्ज और सरदार उधम सिंह को जलियांवाला बाग के दोषी माइकल ओ डायर की हत्या करते हुए दिखाया गया।

श्री मोदी 73वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पर आयोजित मुख्य समारोह के समापन के बाद दर्शकों के बीच पहुंचे और उनका अभिवादन स्वीकार किया। उन्होंने राजपथ पर 73वें गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित मुख्य समारोह के समापन के बाद राष्ट्रपति को विदाई दी। इसके बाद उन्होंने थोड़ी देर तक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ गुफ्तगू की और फिर वह हर साल की तरह दर्शकों का अभिवादन स्वीकार करने के लिए उनके पास पहुंच गये। उन्होंने हाथ हिलाकर राजपथ के दोनों ओर बैठे दर्शकों का अभिवादन स्वीकार किया।
गणतंत्र दिवस के मौके पर श्री मोदी के पहनावे ने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। श्री मोदी ने आज मणिपुरी अंगवस्त्र तथा उत्तराखंड की टोपी धारण कर रखी थी, जिसमें ब्रह्म कमल अंकित था। गौरतलब है कि श्री मोदी जब भी उत्तराखंड के केदारनाथ में बाबा भोले भंडारी का दर्शन करने जाते हैं, तो उन्हें ब्रह्मकमल अवश्य अर्पित करते हैं।
समारोह में पहुंचे दर्शक भी श्री मोदी को अपनी बीच पाकर काफी खुश नजर आए। दर्शकों ने भी हाथ हिलाकर श्री मोदी का स्वागत किया। इस दौरान लोगों ने मोदी-मोदी के नारे भी लगाए।
राजपथ पर आयोजित मुख्य समारोह में सांस्कृतिक तथा लोक कलाओं का अनूठा संगम नजर आया। इस साल गणतंत्र दिवस परेड के दौरान 12 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों तथा नौ मंत्रालयों/विभागों की झांकियां निकाली गयीं।
उत्तर प्रदेश की झांकी में इस बार काशी विश्वनाथ मंदिर मुख्य आकर्षण रहा। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जिसका हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकार्पण किया है, उसको प्रमुखता से दर्शाया गया।
उत्तराखंड की झांकी में सिखों के प्रमुख तीर्थ हेमकुंड साहिब, टिहरी डैम, डोबरा चांठी पुल और चार धाम में से एक बदरीनाथ धाम के साथ ही सरकार की उत्तराखंड के चार धाम को लेकर चल रही महत्वपूर्ण योजना ‘ऑल वेदर रोड’ का प्रदर्शन किया गया।
वहीं पंजाब की झांकी में राज्य से जुड़े स्वतंत्रता सैनिकों और उनके संघर्ष की कहानी को दर्शाया गया। इसमें भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू की प्रतिमा के साथ लाला लाजपत राय पर हुए लाठी चार्ज और सरदार उधम सिंह को जलियांवाला बाग के दोषी माइकल ओ डायर की हत्या करते हुए दिखाया गया।

उत्तर प्रदेश में नश्तर चुभोती बर्फीली हवाओं के बीच बुधवार को 73वां गणतंत्र दिवस देश भक्ति की भावना के साथ पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मुख्य समाराेह राजधानी लखनऊ के विधानभवन के सामने संपन्न हुआ जहां राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने ध्वजारोहण किया और परेड की सलामी ली। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके मंत्रिमंडल के कई सदस्यों के अलावा अनेक दलों के नेता, अधिकारी एवं अन्य गणमान्य अतिथि मौजूद थे।
परेड में सेना, पुलिस, पीएसी, होमगार्डस, विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने मार्च पास्ट किया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों एवं विद्यालयों ने मनोरम झांकी निकाली। प्रदेश के स्थानीय कलाकारों ने समूह नृत्य व अन्य प्रस्तुतियाँ दी। भारतीय संस्कृति और प्रदेश की विकास यात्रा को दर्शाती झांकियों और परेड को देखने के लिये बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे।
इससे पहले राज्यपाल ने राजभवन में ध्वजारोहण किया तथा राजभवन के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं सुरक्षाकर्मियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी। उधर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास पर झंडा रोहण किया और जनता को संविधान के गौरवशाली इतिहास का जानकारी दी। उन्होने संविधान में आम नागरिक को दिये गये मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य की व्याख्या की और देश के विकास के लिये ईमानदारी से कर्तव्य पालन का आवाहन किया।
बिहार के राज्यपाल फागू चौहान ने राज्य सरकार को सुशासन एवं न्याय के साथ सभी वर्गों के विकास के लिए संकल्पित बताया और कहा कि वह प्रदेश में कानून का राज स्थापित रखने, महिला सशक्तिकरण, कृषि एवं रोजगार सृजन के उद्देश्य से उद्योगों के विकास की खातिर निरंतर प्रयासरत है।
श्री चौहान ने बुधवार को 73वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में झंडोत्तोलन के बाद अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार ने हमेशा सुशासन एवं न्याय के साथ विकास पर जोर दिया है और सभी क्षेत्रों और वर्गों के विकास के लिए संकल्पित है। राज्य में कानून का राज स्थापित रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार अपराध नियंत्रण एवं विधि-व्यवस्था संधारण के लिए सभी आयामों पर योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है। इसके लिए पुलिस बल की संख्या में बढ़ोतरी की गई है। पुलिस के लिए वाहन एवं अन्य संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। थानों में अनुसंधान एवं विधि-व्यवस्था की अलग-अलग व्यवस्था की गई है। आपराधिक मामलों की शीघ्र सुनवाई एवं स्पीडी ट्रायल का अनुश्रवण किया जा रहा है।
समारोह में उनके साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, उप मुख्यमंत्री रेणु देवी समेत सांसद, मंत्री, विधायक, विधान परिषद सदस्य और विभिन्न विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज 73वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर अपने आवास पर झंडोत्तोलन किया। उन्होंने एक, अणे मार्ग स्थित आवास पर झंडोत्तोलन किया। इस अवसर पर उन्होंने सशस्त्र टुकड़ियो की सलामी ली तथा सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी।
झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित राजकीय समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
राज्यपाल श्री बैस ने तिरंगा फहराने के बाद राज्य के नाम अपने संबोधन में कहा कि सरकार ने विगत दो सालों के कार्यकाल में जन कल्याण के अनेक कार्यां को संपन्न किया है और कई नये कार्यक्रमों की शुरुआत भी की गयी है। सभी क्षेत्रों और वर्गा, विशेषकर गरीबों, कमजोरों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर ही सरकार द्वारा जन कल्याण एवं विकास के कार्य किये जा रहे है। उन्होंने कहा कि राज्य के नियोजनालयों में निबंधित उम्मीदवारों को साक्षात्कार में बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार करने के वास्ते महिन्द्रा प्राइड क्लासरूम के साथ एमओयू किया गया है, जिसके तहत निबंधित उम्मीदवारों और आईटीआई के अंतिम वर्ष के छात्र-छात्राओं को सॉफ्ट स्किल का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षित उम्मीदवारों के लिए महिंद्रा प्राइड क्लासरूम द्वारा अपने स्तर से जॉब उत्सव का आयोजन कराया जाएगा, जिससे राज्य के युवाओं को रोजगार मिलेगा।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने दुमका में आयोजित 73 वें गणतंत्र दिवस समारोह में झंडोत्तोलन किया और आकर्षक परेड का निरीक्षण तथा सलामी ली।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेंद्र प्रसाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरदार बल्लभ भाई पटेल सदृश्य राष्ट्र निर्माताओं और झारखंड के महान विभूति भगवान बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, वीर शहीद सिदो -कान्हू, चांद- भैरव, फूलो -झानो, वीर बुधु भगत, जतरा टाना भगत, नीलाम्बर पीताम्बर, शेख भिखारी, पांडेय गणपत राय और शहीद विश्वनाथ शाहदेव को श्रद्धा सुमन अर्पित की। उन्होंने सुरक्षा बलों के जवानों और राज्यवासियों को गणतंत्र दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दी।
 शाह ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई की अगुआ रही है और यह समस्त राष्ट्र के लिए अत्यंत गौरव की बात है ।
श्री शाह ने कहा कि गणतंत्र दिवस पर वीरता और कर्तव्यपराणता के लिए सम्मनित पुलिसकर्मियों में सबसे अधिक संख्या जम्मू-कश्मीर पुलिस के अधिकारियों और जवानों की है। श्री शाह ने उनकी वीरता और प्रतिबद्धता के लिए उन्हें बधाई दी है।
गृहमंत्री ने कहा, “जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गणतंत्र दिवस पर आज वीरता पुरस्कारों का सबसे बड़ा हिस्सा 115 पदक, जीता है। यह उनकी वीरता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मैं सभी को बधाई देता हूं। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर जम्मू-कश्मीर पुलिस के कर्मियों और उनकी बहादुरी को सलाम।”
उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार हमारे बहादुर पुलिस कर्मियों को पहचानने और उनका सम्मान करने के लिए प्रतिबद्ध है। सभी को 73वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं।”
गृह मंत्री ने गणतंत्र दिवस की शुभकामना देते हुए कहा , ‘भारतीय गणतंत्र के गौरव, एकता व अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करने वाले सभी जवानों को नमन करता हूँ। आइए आज हम सभी स्वाधीनता के लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता सुनिश्चित करने का संकल्प लें।”
इस बीच इंटरनेट सर्च इंजन गूगल ने भारत के 73वें गणतंत्र दिवस के मौके पर विशेष और आकर्षक डूडल बनाकर देशवासियों को बधाई दी है। गूगल ने अपने होमपेज पर बनाए डूडल में के बनाए गए डूडल में ऊंट, घोड़ा, हाथी, सफेद कबूतर और ढोलक की तस्वीरों को तिरंगे के रूप में प्रस्तुत किया गया है , जो भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्से हैं।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 72वें गणतंत्र दिवस के मौके पर भी गूगल ने अपने डूडल में देश की कई संस्कृतियों की झलकियां प्रस्तुत की थी।
मध्यप्रदेश में परंपरागत तरीके से हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया और जगह जगह राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराने के साथ ही आकर्षक परेड हुयी। राज्य स्तरीय मुख्य आयोजन भोपाल के मोतीलाल नेहरु स्टेडियम में आयोजित हुआ, जहां राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने तिरंगा फहराने के साथ आकर्षक परेड की सलामी ली।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर में आयोजित आकर्षक और गरिमामय समारोह में ध्वज फहराने के बाद जनता को संबोधित किया। उन्होंने गणतंत्र दिवस पर सभी को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमें उन सभी महापुरुषों को नमन करना चाहिए, जिन्होंने संविधान देश काे दिया और उसी के अनुरूप राष्ट्र चल रहा है। उन्होंने राज्य सरकार की उपलब्धियों का जिक्र भी किया।
विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने रीवा जिला मुख्यालय पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और भव्य परेड की सलामी ली। उन्होंने मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन भी किया। गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय पर गणतंत्र दिवस परेड की सलामी ली और मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन किया। विभिन्न जिला मुख्यालयों पर राज्य के शेष मंत्रियों ने तिरंगा फहराकर मुख्यमंत्री का संदेश पढ़ा। शेष जिलों में कलेक्टरों ने तिरंगा फहराकर मुख्यमंत्री का संदेश जनता को सुनाया।
छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुईया उइके ने कहा कि कोरोना काल की चुनौतियों के बीच राज्य सरकार की आकर्षक नीतियों और योजनाओं के कारण बड़ी संख्या में किसान फिर खेती की ओर आकर्षित हुए हैं जिससे रोजगार के नए अवसर भी विकसित हुए हैं।
सुश्री उइके ने रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में 73 वें गणतंत्र दिवस के अवसर आयोजित मुख्य समारोह में ध्वजारोहण करने के बाद लोगो को सम्बोधित करते हुए कहा कि रोजगार के नए अवसरों को बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा उद्योग तथा कारोबार के क्षेत्र में भी अनेक रियायतें दी गईं। जन-सामान्य को भी अनेक तरह की आर्थिक राहत देकर उनकी क्रय शक्ति बढ़ाई गई। इस तरह से प्रदेश में अर्थव्यवस्था को संभाला गया जिसके कारण हर स्तर पर मनोबल मजबूत हुआ।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शहरी क्षेत्रों की तरह ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी शासकीय पट्टे की भूमि को फ्री होल्ड करने तथा अनियमित भवन निर्माण के नियमितीकरण के लिए इसी वर्ष एक व्यवहारिक, सरल एवं पारदर्शी कानून बनाने की घोषणा हैं।
श्री बघेल ने जगदलपुर में 73वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण के बाद प्रदेश की जनता के नाम अपने संदेश के दौरान इसके अलावा भी कई नई घोषणाएं की। उन्होंने कहा कि अनियमित भवन निर्माण के नियमितीकरण के लिए कानून बनने से अनेक नागरिक प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे और वे अपनी मेहनत से किए गए निर्माण को नियमित कराकर स्वाभिमान से जीवन-यापन एवं रोज़गार कर सकेंगे। उन्होंने रिहायशी क्षेत्रों में संचालित व्यवसायिक गतिविधियों के नियमितीकरण के लिए भी आवश्यक प्रावधान किए जाने कि घोषणा की जिससे हजारों व्यवसाई आत्मविश्वास के साथ अपना व्यवसाय संचालित कर सकें।

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