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झारखंड में पिछड़ों की 56 पर्सेंट की जनसंख्या के अनुपात में नौकरियों में 36% आरक्षण प्रदान करने के संबंध में

राँची:- भारत देश में मंडल आयोग की सिफारिशें 1990 से लागू है, दुर्भाग्यवश झारखंड की जनता अब तक इससे वंचित है। सन 2002 में झारखंड सरकार ने आरक्षण नीति निर्धारण हेतु तत्कालीन कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा के संचालन में एक कमेटी बनाई गई, जिसमें विभिन्न राज्यों के आरक्षण नीति के अध्ययन के पश्चात झारखंड में आरक्षण सीमा 50% से बढ़ाकर 73% करने की रिपोर्ट सौंपी। तत्कालीन सरकार ने रिपोर्ट के आधार मानकर झारखंड में 73% आरक्षण लागू किया। सरकार के इस निर्णय के खिलाफ उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई। पांच खंडपीठ गठित न्यायाधीशों ने फैसला सुनाते हुए कहा कि राज्य सरकार आवश्यकता अनुसार 73% आरक्षण प्रदान कर सकती है, बशर्ते 50% आरक्षण अस्थाई तौर पर और 23% आरक्षण अस्थाई हो, जब तक कि न्यायालय में चल रहे मामलों का निष्पादन ना हो जाए। महामहिम महोदय को प्रेषित करते हुए हमें खेद हो रहा है कि केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णो को 30% आरक्षण प्रदान किया गया है और यह झारखंड में लागू हो गया है। जबकि झारखंड में सवर्णों की आबादी लगभग 4% है और आरक्षण 10% दिया गया है परंतु 56% पिछड़ी पिछड़ों को मात्र 14% और तो और अनुसूचित जिलों में आरक्षण सुनिश्चित है। अतः महामहिम महोदय से झारखंड पिछड़ा वर्ग संघर्ष मोर्चा विनम्र आग्रह करता है कि झारखंड पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिश को ध्यान में रखते हुए झारखंड की 65% पिछड़ों की आबादी के अनुपात में 36% से लेकर 56% तक और अनुसूचित जिलों में जनसंख्या के अनुसार आरक्षण प्रदान कर पिछड़ी जातियों के साथ न्याय प्रदान करने की महती कृपा प्रदान की जाए। पिछड़ा वर्ग सदैव आपका आभारी रहेगा।

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